मायावती का अखिलेश यादव पर हमला, ‘चवन्नी से रुपया’ बयान को बताया शर्मनाक; जाट समाज से मांगी माफी
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने अखिलेश यादव की ओर से राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और उसके नेता को लेकर दिए गए ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ वाले बयान को अमर्यादित और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस बयान के लिए सपा नेतृत्व को रालोद, उसके नेता, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार और जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।
मायावती ने कहा कि सपा की राजनीति में विरोधी दलों के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों के प्रति भी संकीर्णता और जातिवादी रवैया देखने को मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की ऐसी राजनीति का राजनीतिक फायदा कई बार भाजपा को मिला और धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं।
‘चवन्नी से रुपया’ बयान पर माफी की मांग
मायावती ने अखिलेश यादव के रालोद से जुड़े बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी सहयोगी दल, उसके नेता और उससे जुड़े सामाजिक समूह को लेकर इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि अखिलेश यादव और सपा नेतृत्व को अपने बयान पर रालोद के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ चौधरी चरण सिंह के परिवार तथा जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए।
यह विवाद अखिलेश यादव की उस टिप्पणी के बाद बढ़ा है, जिसमें उन्होंने रालोद और उसके नेतृत्व को लेकर ‘चवन्नी से रुपया’ वाली बात कही थी। इसके बाद रालोद की ओर से भी सपा अध्यक्ष के बयान पर नाराजगी जताई गई।
सपा-बसपा गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का जिक्र
मायावती ने सपा पर हमला करते हुए 1993 में हुए सपा-बसपा गठबंधन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन बनने के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक संबंध खराब हुए और अंततः गठबंधन टूट गया।
उन्होंने 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए सपा पर गंभीर आरोप लगाए। मायावती ने इस घटना को अपने खिलाफ हत्या के षड्यंत्र से जोड़ते हुए सपा की राजनीति पर सवाल उठाए।
मायावती ने कहा कि उस घटना के बाद सपा और बसपा के बीच लंबे समय तक राजनीतिक दूरी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीतिक कार्यशैली में अहंकार और स्वार्थ की भूमिका रही है।
2019 के गठबंधन पर भी साधा निशाना
बसपा प्रमुख ने 2019 के लोकसभा चुनाव में हुए सपा-बसपा गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले दोनों पार्टियां साथ आई थीं, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद गठबंधन टूट गया।
मायावती के मुताबिक, गठबंधन का टूटना सपा के कथित अहंकारी और स्वार्थी रवैये का परिणाम था। उन्होंने कहा कि बसपा ने गठबंधन के दौरान अपने राजनीतिक हितों से ज्यादा व्यापक सामाजिक हित को महत्व दिया, लेकिन सपा का रवैया अलग रहा।
PDA की राजनीति पर भी मायावती का हमला
मायावती ने अखिलेश यादव की PDA की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपने राजनीतिक हित के अनुसार PDA में ‘P’ की अलग-अलग व्याख्या करती है।
बसपा प्रमुख ने सपा की पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और सवर्ण समाज, खासकर ब्राह्मणों के हितों की अनदेखी की गई।
उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सपा पर सवाल उठाए और जनता से आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को सत्ता से दूर रखने की अपील की।
भाजपा को फायदा पहुंचाने का लगाया आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा की संकीर्ण और जातिवादी राजनीति का फायदा कई मौकों पर भाजपा को मिला है। उनके मुताबिक, विपक्षी और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के बीच आपसी संघर्ष से भाजपा को राजनीतिक रूप से मजबूत होने का अवसर मिला।
उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से सपा की कथित जातिवादी और स्वार्थी राजनीति से सावधान रहने की अपील की।
अखिलेश और जयंत के बीच भी बढ़ा विवाद
‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी को लेकर अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी के बीच भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। रालोद की ओर से इस टिप्पणी को जाट समाज के सम्मान से जोड़कर आपत्ति जताई गई है और अखिलेश यादव से बयान वापस लेने तथा माफी मांगने की मांग की गई है।
ऐसे में मायावती के ताजा हमले से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा, बसपा और रालोद के बीच बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले PDA, सामाजिक समीकरण और गठबंधन की राजनीति को लेकर तीनों दलों के बीच राजनीतिक खींचतान महत्वपूर्ण हो सकती है।
रिपोर्टर; दीप सिंह मुख्य, संवाददता लखनऊ

