मुंबई को 10 साल में स्लम-फ्री बनाएंगे फडणवीस, क्लस्टर री-डेवलपमेंट से बदलेगी शहर की तस्वीर
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। उन्होंने कहा है कि अगले 10 वर्षों में मुंबई को स्लम-फ्री बनाने की दिशा में बड़े पैमाने पर काम किया जाएगा। इसके लिए क्लस्टर री-डेवलपमेंट और पुनर्विकास की रणनीति अपनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री के इस ऐलान को मुंबई के शहरी विकास और लंबे समय से चली आ रही झुग्गी बस्तियों की समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का फोकस केवल झुग्गियों को हटाने पर नहीं, बल्कि पुनर्वास और बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी है।
10 साल में स्लम-फ्री मुंबई का लक्ष्य
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य मुंबई को अगले 10 वर्षों में झुग्गी बस्तियों से मुक्त करना है। इसके लिए अलग-अलग इलाकों में क्लस्टर आधारित पुनर्विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
क्लस्टर री-डेवलपमेंट के तहत छोटे-छोटे भूखंडों और अलग-अलग इमारतों के बजाय बड़े क्षेत्र को एक साथ लेकर नियोजित तरीके से विकास किया जाता है। इससे सड़क, आवास, सार्वजनिक सुविधाओं और दूसरी बुनियादी सेवाओं को बेहतर तरीके से विकसित करने में मदद मिल सकती है।
धारावी पुनर्विकास परियोजना पर भी जोर
मुंबई के सबसे बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स में से एक धारावी पुनर्विकास परियोजना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। धारावी परियोजना के पहले चरण में करीब 10,000 पुनर्वास घर तैयार किए जाने की योजना है और इसे लगभग 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था।
धारावी का पुनर्विकास मुंबई के शहरी ढांचे को बदलने वाली बड़ी परियोजनाओं में माना जाता है। सरकार की योजना झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को बेहतर और नियोजित आवास उपलब्ध कराने की है।
सिर्फ झुग्गियां हटाना नहीं, बेहतर पुनर्वास भी जरूरी
मुंबई को स्लम-फ्री बनाने की योजना में सबसे बड़ी चुनौती पुनर्वास की होगी। लंबे समय से झुग्गी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक आवास, रोजगार तक पहुंच और रोजमर्रा की सुविधाओं को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
सरकार की पुनर्विकास नीति में इस बात पर जोर है कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था भी की जाए। बेहतर आवास के साथ सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं को भी मजबूत करने की जरूरत होगी।
मुंबई में बढ़ते शहरी दबाव से निपटने की तैयारी
मुंबई में आबादी और रियल एस्टेट की मांग लगातार बढ़ने के साथ शहर पर बुनियादी ढांचे का दबाव भी बढ़ा है। सरकार की योजना केवल मौजूदा इलाकों के पुनर्विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई महानगर क्षेत्र में नए शहरी केंद्र विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ने वाली आबादी के दबाव को कम करना और मुंबई के आसपास के क्षेत्रों में बेहतर आवास एवं बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है।
क्लस्टर री-डेवलपमेंट से बदल सकती है तस्वीर
क्लस्टर री-डेवलपमेंट को मुंबई की पुरानी और घनी बस्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल माना जा रहा है। इसमें कई छोटे प्लॉट और पुरानी संरचनाएं एक बड़े विकास क्षेत्र में शामिल की जाती हैं।
इस मॉडल के जरिए बेहतर प्लानिंग के साथ आवासीय इमारतों, सड़कों और सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण किया जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतिगत फैसलों के साथ जमीन, वित्त और पुनर्वास से जुड़ी चुनौतियों का समाधान भी जरूरी होगा।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
मुंबई को 10 साल में स्लम-फ्री बनाने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। इसके लिए सरकार को अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय, परियोजनाओं की समयसीमा, पुनर्वास और वित्तीय संसाधनों पर लगातार काम करना होगा।
इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पुनर्विकास की प्रक्रिया में लंबे समय से रह रहे लोगों के हित सुरक्षित रहें और उन्हें समय पर वैकल्पिक आवास उपलब्ध हो।
फडणवीस सरकार का बड़ा शहरी विकास एजेंडा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह ऐलान महाराष्ट्र सरकार के बड़े शहरी विकास एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा है। मुंबई को बेहतर आवास, मजबूत बुनियादी ढांचे और नियोजित शहरी विकास के साथ आगे ले जाने की योजना पर सरकार जोर दे रही है।
यदि यह योजना तय समयसीमा के मुताबिक आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में मुंबई के कई इलाकों का स्वरूप बदल सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती इस बड़े लक्ष्य को जमीन पर लागू करना और पुनर्वास प्रक्रिया को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाए रखना होगी।
रिपोर्टर ; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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