PM मोदी बोले- 2014 से पहले कुछ सौ स्टार्टअप थे, अब संख्या 2.5 लाख के पार
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल तकनीक और नवाचार की बढ़ती भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में कुछ सौ स्टार्टअप ही हुआ करते थे, जबकि अब इनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि टेक्नोलॉजी, डेटा, ज्ञान और इनोवेशन की असली ताकत तभी है, जब उनका इस्तेमाल लोगों को सशक्त बनाने और नए अवसर पैदा करने के लिए किया जाए।
‘पावर टू एम्पावर’ होना चाहिए हमारा लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में डेटा, ज्ञान और नवाचार शक्ति के प्रमुख स्रोत बन गए हैं। लेकिन महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इस शक्ति का उपयोग किस तरह किया जा रहा है। उन्होंने तकनीकी प्रगति को केवल प्रतिस्पर्धा या नियंत्रण तक सीमित रखने के बजाय लोगों को सक्षम बनाने और दूसरों की सफलता में सहयोग करने पर जोर दिया।
उन्होंने अपनी सोच को ‘पावर टू एम्पावर’ यानी शक्ति के माध्यम से दूसरों को सशक्त बनाने की अवधारणा से जोड़ा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, तकनीक का वास्तविक लाभ तब बढ़ता है, जब समाज के अधिक से अधिक लोगों को इसका इस्तेमाल करने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
छोटे शहरों से भी सामने आ रहे स्टार्टअप
प्रधानमंत्री ने भारत के स्टार्टअप क्षेत्र में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि अब नवाचार केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, देश के करीब आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से आ रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 45 प्रतिशत स्टार्टअप में महिला निदेशक या महिला साझेदार हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि नवाचार के अवसर अधिक लोगों तक पहुंच रहे हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों से नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।
डिजिटल तकनीक से आम लोगों को फायदा
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक डिजिटल भुगतान की सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों को भी भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम का अनुभव लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि एक रेहड़ी-पटरी वाला दुकानदार और कार शोरूम संचालक अलग-अलग स्तर पर कारोबार करते हैं, लेकिन दोनों डिजिटल भुगतान के लिए एक ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इसे समावेशी तकनीक की ताकत बताया।
उनके मुताबिक, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार आर्थिक गतिविधियों में अधिक लोगों की भागीदारी बढ़ाने और तकनीक तक पहुंच आसान बनाने में मदद कर सकता है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अनुभव दूसरे देशों से साझा कर रहा भारत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) से जुड़े अनुभव दूसरे देशों के साथ साझा कर रहा है, ताकि वे अपनी जरूरतों के अनुसार डिजिटल प्रणालियां विकसित कर सकें।
उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान विकसित कोविन प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया और बताया कि इसे ओपन-सोर्स प्रणाली के रूप में तैयार किया गया था। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत की तकनीकी क्षमताओं का लाभ दूसरे देशों तक पहुंचना चाहिए, जिससे उन्हें अपनी चुनौतियों के समाधान तलाशने में मदद मिल सके।
सरकारी योजनाओं में तकनीक की भूमिका पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी सहायता के वितरण में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे सरकारी सहायता पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की गई है।
उनके अनुसार, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डीबीटी से बिचौलियों की भूमिका कम करने, नागरिकों की सुविधा बढ़ाने और सरकार तथा जनता के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद मिली है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल व्यवस्था को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को आसान बनाना और सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना भी होना चाहिए।
भारत की आर्थिक और तकनीकी क्षमता पर भी चर्चा
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति, सुधारों और वैश्विक सहयोग की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा का उद्देश्य केवल अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सहयोग और साझा समृद्धि को बढ़ावा देना भी है।
प्रधानमंत्री ने भारत की डिजिटल क्षमताओं, उद्यमिता और तकनीकी नवाचार को देश के विकास के महत्वपूर्ण आधारों के रूप में प्रस्तुत किया। फोरम में दुनिया के विभिन्न देशों के सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक और भविष्य की विकास संभावनाओं पर चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि तकनीक और नवाचार की सफलता का आकलन केवल उनकी क्षमता से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि वे कितने लोगों के लिए अवसर पैदा करते हैं और समाज को किस हद तक सशक्त बनाते हैं।

