Ram Mandir CEO: जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति से बदलेगा 6 साल पुराना प्रशासनिक सिस्टम
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के करीब छह साल बाद राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ राम मंदिर के प्रबंधन को ज्यादा संस्थागत, तकनीक आधारित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट की नई व्यवस्था ऐसे समय में सामने आई है, जब मंदिर में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, दान और चढ़ावे की निगरानी, निर्माण कार्यों की प्रगति और रोजमर्रा के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। CEO के पद की शुरुआत को इसी प्रशासनिक जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है।
पहली बार बनाया गया CEO का पद
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब तक मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण कामों का संचालन ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अलग-अलग व्यवस्थाओं के जरिए किया है। अब पहली बार CEO का पद बनाया गया है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जितेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना में करीब 39 साल से ज्यादा समय तक सेवा दे चुके हैं। वह मई 2026 में एयर मार्शल के पद से रिटायर हुए थे। सैन्य सेवा के दौरान उन्हें प्रशासन, नेतृत्व और बड़े स्तर पर ऑपरेशनल मैनेजमेंट का अनुभव मिला।
राम मंदिर CEO के पास क्या होंगी जिम्मेदारियां?
CEO की नियुक्ति का उद्देश्य मंदिर के दैनिक प्रशासन को एक केंद्रीकृत और पेशेवर व्यवस्था देना है। जितेंद्र मिश्र के सामने मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम होंगे।
इनमें मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन, कर्मचारियों से जुड़े मामलों की निगरानी, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर करना, निर्माण और विकास परियोजनाओं की मॉनिटरिंग तथा वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना शामिल है।
इसके अलावा दान और चढ़ावे से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जा रही है। मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और इसके साथ नकद तथा अन्य माध्यमों से बड़ी मात्रा में दान भी आता है।
चढ़ावे की गिनती में भी बड़ा बदलाव
CEO की नियुक्ति के तुरंत बाद मंदिर प्रशासन को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। राम मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गिनती को मशीनों के जरिए कराने की तैयारी की जा रही है।
ट्रस्ट की बैठक में इस व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई है। प्रस्तावित व्यवस्था में हाई-स्पीड नोट काउंटिंग मशीन, सिक्के गिनने वाली ऑटोमेटिक मशीन और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए दो बैंकों और IIT के विशेषज्ञों से प्रस्ताव भी लिए गए हैं। अब इन प्रस्तावों का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन किया जा रहा है।
माना जा रहा है कि मशीनों के इस्तेमाल से चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा। इससे प्रक्रिया को तेज करने के साथ-साथ निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
चढ़ावा चोरी विवाद के बाद बढ़ी निगरानी
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े विवाद के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में निगरानी और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे थे। इसी पृष्ठभूमि में ट्रस्ट ने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, SIT की शुरुआती जांच में गिनती कक्ष की निगरानी से जुड़ी कमियों और चढ़ावे में सेंध की घटनाओं से संबंधित तथ्य सामने आए थे। इसके बाद मंदिर की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई।
हालांकि, किसी भी अनियमितता से जुड़े आरोपों और जांच के निष्कर्षों को संबंधित जांच प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
ट्रस्ट में भी हुए कई अहम बदलाव
CEO की नियुक्ति अकेला बदलाव नहीं है। राम मंदिर ट्रस्ट की संरचना में भी फेरबदल किया गया है। ट्रस्ट ने तीन नए सदस्यों को शामिल किया है। इनमें मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य बनी हैं।
इसके अलावा गोविंद देव गिरि को नया महासचिव बनाया गया है, जबकि महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इससे ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे में भी बदलाव हुआ है।
ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा है जितेंद्र मिश्र का नाम
जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की पश्चिमी दिशा की सैन्य कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि और लंबे प्रशासनिक अनुभव को ट्रस्ट की ओर से महत्वपूर्ण माना गया है।
अब सैन्य सेवा के बाद वह अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने एक बड़े धार्मिक परिसर के संचालन के साथ-साथ लाखों श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की चुनौती होगी।
छह साल बाद क्यों बदली व्यवस्था?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए किया गया था। मंदिर निर्माण के साथ इसकी गतिविधियां लगातार बढ़ती गईं। अब मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और दान, सुरक्षा, साफ-सफाई, कर्मचारी प्रबंधन, निर्माण परियोजनाओं तथा दर्शन व्यवस्था जैसे कई स्तरों पर काम होता है।
ऐसे में ट्रस्ट के भीतर एक CEO की नियुक्ति को प्रशासनिक कामकाज को एक पेशेवर ढांचा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। CEO के जरिए रोजमर्रा के प्रशासन और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश होगी।
तकनीक और अनुशासन पर रहेगा जोर
नई व्यवस्था में दो चीजों पर विशेष जोर दिखाई दे रहा है—तकनीक और प्रशासनिक अनुशासन। चढ़ावे की गिनती को मशीनों से जोड़ने की तैयारी इसका उदाहरण है। इससे नकदी की गिनती और सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश होगी।
जितेंद्र मिश्र की सैन्य पृष्ठभूमि को देखते हुए प्रशासन में समयबद्ध निर्णय, स्पष्ट जिम्मेदारी और निगरानी को भी महत्व मिलने की उम्मीद है। हालांकि, नई व्यवस्था का वास्तविक असर आने वाले समय में उसके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
श्रद्धालुओं की सुविधाएं भी बड़ी प्राथमिकता
राम मंदिर में लगातार बढ़ती भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की सुविधाएं सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक हैं। दर्शन व्यवस्था, प्रवेश और निकास, सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाए रखना मंदिर प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।
CEO के जरिए इन व्यवस्थाओं की निगरानी को अधिक केंद्रीकृत किए जाने की उम्मीद है। इससे अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय बेहतर हो सकता है और किसी समस्या पर तेजी से फैसला लेने में मदद मिल सकती है।
अब आगे क्या?
राम मंदिर ट्रस्ट में हुए ये बदलाव आने वाले वर्षों में मंदिर के प्रशासन को नया स्वरूप दे सकते हैं। एक तरफ CEO के रूप में जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति हुई है, वहीं दूसरी तरफ ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों में भी बदलाव किया गया है।
चढ़ावे की गिनती में मशीनों के इस्तेमाल की तैयारी यह संकेत देती है कि मंदिर प्रशासन अब बड़े पैमाने पर तकनीक और डिजिटल मॉनिटरिंग को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इन बदलावों का असर मंदिर की वित्तीय पारदर्शिता, प्रशासनिक दक्षता और श्रद्धालु सुविधाओं पर दिखाई दे सकता है।
कुल मिलाकर, Ram Mandir CEO के रूप में जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति अयोध्या राम मंदिर के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय है। अब देखना होगा कि सैन्य अनुभव और पेशेवर प्रबंधन का यह मॉडल मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था और भविष्य की परियोजनाओं को किस तरह प्रभावित करता है।
रिपोर्टर ; जसलीन कौर, मुख्य प्रबंधक

