Tamil Nadu Temple Mobile Ban: 52 मंदिरों में मोबाइल पर पाबंदी, जानें विजय सरकार का फैसला
तमिलनाडु के मंदिरों में श्रद्धालु सदियों से फूल, नारियल, कपूर और प्रसाद लेकर भगवान के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते रहे हैं। मंदिरों में लोग न केवल धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, बल्कि अपनी निजी परेशानियां और मनोकामनाएं लेकर भी आते हैं। हालांकि, बदलते दौर में मंदिरों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। शुरुआत में श्रद्धालु देवी-देवताओं की तस्वीरें और वीडियो बनाने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करते थे, लेकिन धीरे-धीरे सेल्फी, रील्स और सोशल मीडिया कंटेंट ने मंदिरों के माहौल को प्रभावित करना शुरू कर दिया।
इसी को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने राज्य के 52 प्रमुख मंदिरों में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से प्रभावी हुई है। श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश करने से पहले अपने मोबाइल फोन निर्धारित काउंटर पर जमा कराने होंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, फोन रखने के लिए मंदिरों में विशेष काउंटर और सुरक्षित स्टोरेज की व्यवस्था की गई है।
मंदिरों में क्यों लगाया गया मोबाइल बैन?
सरकार और मंदिर प्रशासन की ओर से इस कदम का मुख्य उद्देश्य धार्मिक स्थलों की पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण को बनाए रखना बताया गया है। मंदिर परिसर में लगातार फोटो खींचने, वीडियो बनाने, सेल्फी लेने और सोशल मीडिया के लिए रील्स तैयार करने से दूसरे श्रद्धालुओं का ध्यान भटकने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
मंदिर में आने वाला व्यक्ति आमतौर पर कुछ समय शांति से पूजा और दर्शन करना चाहता है। ऐसे में मोबाइल की घंटियां, वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया के लिए बनाए जा रहे कंटेंट से मंदिर का माहौल प्रभावित हो सकता है। सरकार का तर्क है कि मोबाइल के इस्तेमाल पर नियंत्रण से श्रद्धालुओं को पूजा और दर्शन पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।
52 प्रमुख मंदिरों में लागू हुआ नियम
तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के तहत आने वाले 52 प्रमुख मंदिरों में इस व्यवस्था को लागू किया गया है। मंदिरों के प्रवेश द्वार पर मोबाइल फोन जमा करने के लिए काउंटर बनाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को फोन लेकर परिसर के अंदर जाने की जरूरत न पड़े।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मंदिरों में मोबाइल जमा कराने के लिए मामूली शुल्क भी लिया जा रहा है। कई जगहों पर प्रति फोन करीब 5 रुपये का शुल्क निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मोबाइल जमा कराने के बाद कैसे होगा दर्शन?
नए नियम के तहत श्रद्धालु मंदिर पहुंचने के बाद अपने मोबाइल फोन को निर्धारित काउंटर या लॉकर में जमा करेंगे। इसके बाद उन्हें टोकन या जमा से संबंधित व्यवस्था के जरिए फोन वापस लेने की सुविधा दी जाएगी।
मंदिर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि जमा किए गए मोबाइल फोन सुरक्षित रहें और दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को उन्हें वापस लेने में परेशानी न हो। इसी वजह से सुरक्षित काउंटर और स्टोरेज व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
कैमरा रहित फोन को लेकर क्या है नियम?
मोबाइल बैन को लेकर एक महत्वपूर्ण अपवाद भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कैमरा रहित मोबाइल फोन को इस प्रतिबंध से अलग रखा गया है। यानी नियम का मुख्य फोकस कैमरे वाले स्मार्टफोन के जरिए फोटो, वीडियो और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने पर रोक लगाना है।
हालांकि, अलग-अलग मंदिरों में स्थानीय स्तर पर नियमों के पालन की प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में प्रवेश से पहले वहां लागू निर्देशों को देखना जरूरी होगा।
क्या मंदिर में रील्स और सेल्फी पर भी लगेगी रोक?
मोबाइल बैन का सबसे बड़ा असर सेल्फी और रील्स बनाने वालों पर पड़ने वाला है। पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक स्थलों पर सोशल मीडिया कंटेंट बनाने का चलन काफी बढ़ा है। कई लोग मंदिरों में दर्शन के साथ फोटो और वीडियो बनाकर उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हैं।
सरकार का यह कदम ऐसे कंटेंट को नियंत्रित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मोबाइल फोन ही मंदिर के अंदर नहीं होगा तो फोटो और वीडियो बनाने की संभावना भी काफी कम हो जाएगी।
फैसले के समर्थन में भी तर्क, कुछ सवाल भी
मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के समर्थन में यह तर्क दिया जा रहा है कि मंदिर पूजा और आध्यात्मिक साधना के स्थान हैं, न कि सोशल मीडिया कंटेंट बनाने की जगह। मोबाइल से दूरी श्रद्धालुओं को कुछ समय के लिए डिजिटल दुनिया से अलग होकर धार्मिक अनुभव पर ध्यान देने का अवसर दे सकती है।
हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर कुछ व्यावहारिक सवाल भी उठ रहे हैं। श्रद्धालुओं को जरूरी फोन कॉल, डिजिटल भुगतान या किसी आपात स्थिति में संपर्क की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा मोबाइल जमा कराने के लिए पर्याप्त काउंटर नहीं होने पर भीड़ बढ़ने की समस्या पैदा हो सकती है। कुछ श्रद्धालुओं ने फोन जमा कराने की प्रक्रिया को और सुविधाजनक बनाने की जरूरत बताई है।
मंदिरों में डिजिटल अनुशासन की नई शुरुआत?
तमिलनाडु का यह फैसला धार्मिक स्थलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर बड़ी बहस को जन्म दे सकता है। एक तरफ मोबाइल आज रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है, वहीं दूसरी तरफ मंदिर जैसे स्थानों पर इसके इस्तेमाल को सीमित करने की मांग भी लगातार उठती रही है।
Tamil Nadu Temple Mobile Ban को इसी व्यापक बहस के संदर्भ में देखा जा सकता है। सरकार का उद्देश्य केवल मोबाइल फोन को मंदिर से दूर रखना नहीं, बल्कि मंदिरों के धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल को सोशल मीडिया संस्कृति के बढ़ते प्रभाव से बचाना भी बताया जा रहा है।
फिलहाल 52 प्रमुख मंदिरों में लागू इस व्यवस्था के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन पर क्या असर पड़ता है। यदि व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में अन्य धार्मिक स्थलों पर भी इसी तरह के नियम लागू किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रिपोर्टर ; जसलीन कौर, मुख्य प्रबंधक

