एसपी सिंह ओबेरॉय: इंसानियत और मानव सेवा की असाधारण कहानी
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द | विशेष संवाददाता
जिसने दौलत को नहीं, इंसानियत को बनाया अपनी असली पहचान
दुनिया में धन कमाने वाले लोगों की कमी नहीं है, लेकिन अपनी कमाई और सफलता को जरूरतमंदों की जिंदगी बेहतर बनाने में लगाने वाले लोग बहुत कम होते हैं। एसपी सिंह ओबेरॉय इसी विरल श्रेणी में शामिल एक ऐसे नाम हैं, जिन्होंने कारोबार की दुनिया में सफलता हासिल करने के बाद मानव सेवा को अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाया।
दुबई में उद्योग और व्यवसाय से जुड़े सरदार एस.पी. सिंह ओबेरॉय ने अपनी पहचान केवल एक सफल उद्यमी के रूप में नहीं बनाई, बल्कि ‘सरबत दा भला’ यानी सभी के कल्याण की भावना को अपने सामाजिक कार्यों का आधार बनाया। उनके नेतृत्व से जुड़े सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट की गतिविधियां स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा सहायता, विधिक सहायता, जरूरतमंदों की मदद, शहीद परिवारों के सहयोग, वरिष्ठ नागरिकों की सेवा और संकट में फंसे भारतीयों की सहायता जैसे क्षेत्रों तक फैली हुई हैं।
उनकी कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि यह केवल करोड़ों रुपये दान करने वाले उद्योगपति की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे व्यक्ति की यात्रा है, जिसने साधारण मैकेनिक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करने वाला उद्यमी बना। इसके साथ ही उन्होंने अपनी आर्थिक सफलता को समाज सेवा का माध्यम बनाया।
मैकेनिक से उद्योगपति और फिर समाजसेवी तक का सफर
एस.पी. सिंह ओबेरॉय का जीवन संघर्ष और सफलता के कई पड़ावों से होकर गुजरा। शुरुआती दौर में उन्होंने मैकेनिक के रूप में काम किया। इसके बाद कारोबार की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे अपना व्यवसाय खड़ा किया।
व्यावसायिक सफलता के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती गई, लेकिन उन्होंने अपनी संपत्ति को केवल निजी सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं रखा। समय के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता करना उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया।
उनके सेवा कार्यों का सबसे चर्चित अध्याय विदेश में फंसे भारतीयों की मदद से जुड़ा है।
वह घटना जिसने बदल दी जिंदगी की दिशा
दुबई में कुछ भारतीय युवकों के खिलाफ चल रहे एक गंभीर आपराधिक मामले ने एस.पी. सिंह ओबेरॉय के जीवन की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।
इन युवकों को हत्या के मामले में मृत्युदंड का सामना करना पड़ रहा था। मामला केवल अदालत और कानून तक सीमित नहीं था। इसके पीछे कई परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने कानूनी लड़ाई लड़ने और अपने परिजनों को बचाने की बड़ी चुनौती थी।
एस.पी. सिंह ओबेरॉय ने मामले में आर्थिक और मानवीय स्तर पर सहायता की। उपलब्ध संस्थागत विवरणों के अनुसार, उन्होंने ऐसे मामलों में अपने निजी संसाधनों से बड़ी राशि खर्च की और मृत्युदंड का सामना कर रहे भारतीयों को कानूनी प्रक्रिया में मदद उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।
उनकी संस्था की जानकारी के अनुसार, कई भारतीयों को मृत्युदंड से बचाने और विदेशों में सजा पूरी कर चुके ऐसे कैदियों की भारत वापसी में भी सहायता की गई, जो आर्थिक अभाव के कारण अपने देश नहीं लौट पा रहे थे।
यही वह दौर था, जब उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया।
व्यवसाय से सेवा की ओर, धन से दान की ओर और व्यक्तिगत सफलता से सामूहिक कल्याण की ओर।
‘सरबत दा भला’ बना जीवन का संकल्प
समाज सेवा को व्यवस्थित और व्यापक रूप देने के लिए सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट की गतिविधियों का विस्तार हुआ।
‘सरबत दा भला’ का अर्थ है—सबका भला। इसी विचार के आधार पर ट्रस्ट की गतिविधियों को समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
ट्रस्ट की ओर से स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक सहायता, चिकित्सा सेवाओं, रक्तदान शिविरों, जरूरतमंद परिवारों की सहायता और अन्य सामाजिक गतिविधियों पर काम किया जाता है।
इस सेवा का उद्देश्य किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने पर जोर दिया गया।
स्वास्थ्य सेवा को बनाया सबसे बड़ा माध्यम
एस.पी. सिंह ओबेरॉय के सेवा कार्यों में स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया है।
गंभीर और लंबे समय से बीमार मरीजों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता, जरूरतमंद मरीजों की सर्जरी में सहयोग और कम लागत पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे कार्य इस सेवा मॉडल का हिस्सा हैं।
गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी ट्रस्ट ने बड़े स्तर पर काम किया है। ट्रस्ट अपनी वेबसाइट पर विभिन्न स्थानों पर लगभग 240 डायलिसिस यूनिट स्थापित करने का दावा करता है।
डायलिसिस जैसी महंगी चिकित्सा सेवा गरीब परिवारों के लिए लंबे समय तक आर्थिक बोझ बन सकती है। ऐसे में कम लागत पर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कम कीमत पर चिकित्सा सुविधा देने की कोशिश
ट्रस्ट से जुड़ी स्वास्थ्य पहलों में केवल अस्पताल या डायलिसिस सेंटर ही शामिल नहीं हैं। विभिन्न स्थानों पर मेडिकल टेस्ट, डायग्नोस्टिक सेवाएं और अन्य चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
इस मॉडल की खास बात यह है कि मरीजों को कम कीमत पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को इलाज के लिए कर्ज लेने या उपचार टालने की स्थिति से बचाने में मदद मिल सकती है।
जम्मू के अखनूर में भी पहुंची स्वास्थ्य सेवा
जून 2025 में जम्मू के अखनूर स्थित गुरुद्वारा तपो स्थान में एक हेल्थ केयर सेंटर का उद्घाटन किया गया। इस केंद्र में क्लिनिकल लैब, फिजियोथेरेपी और डेंटल सेवाओं जैसी सुविधाएं शामिल थीं।
इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को रियायती दरों पर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना था। इसी अवसर पर एंबुलेंस और अल्ट्रासाउंड सुविधा भी रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी।
यह पहल बताती है कि एस.पी. सिंह ओबेरॉय से जुड़े सेवा कार्यों में स्वास्थ्य को केवल इलाज तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि जांच और शुरुआती चिकित्सा सहायता को भी महत्व दिया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में भी सेवा
किसी भी समाज के विकास में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी वजह से एस.पी. सिंह ओबेरॉय की सेवा गतिविधियों में शिक्षा भी एक प्रमुख क्षेत्र है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों और विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए सहायता देने की दिशा में काम किया गया है। ग्रामीण और जरूरतमंद वर्गों तक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की कोशिशें भी ट्रस्ट की गतिविधियों का हिस्सा रही हैं।
उनका सेवा मॉडल इस सोच पर आधारित दिखाई देता है कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को केवल तत्काल आर्थिक मदद देना ही पर्याप्त नहीं है। यदि शिक्षा और कौशल के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो व्यक्ति लंबे समय में अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
शहीद परिवारों और जरूरतमंदों की मदद
एस.पी. सिंह ओबेरॉय की सामाजिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शहीद परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सहायता भी है।
जरूरतमंद परिवारों की आर्थिक मदद, गरीब बेटियों के विवाह में सहयोग, चिकित्सा सहायता और अन्य सामाजिक जरूरतों में मदद जैसे कार्य किए जाते रहे हैं।
आपदा या संकट के समय भी राहत और सहायता पहुंचाने की कोशिशें की गई हैं। इस तरह सेवा का दायरा अस्पतालों और स्कूलों से आगे बढ़कर रोजमर्रा की सामाजिक जरूरतों तक पहुंचता है।
विदेशों में संकट में फंसे भारतीयों के लिए सहारा
एस.पी. सिंह ओबेरॉय का नाम विदेशों में संकट का सामना कर रहे भारतीयों की मदद से भी जुड़ा रहा है।
विदेशों में कानूनी मामलों में फंसे लोगों के परिवार अक्सर आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे मामलों में कानूनी सहायता और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकता है।
सजा पूरी कर चुके कुछ भारतीय कैदियों को भारत वापस लाने में भी सहायता किए जाने का उल्लेख ट्रस्ट की ओर से किया गया है। कई मामलों में लोग अपनी सजा पूरी करने के बाद भी टिकट या यात्रा का खर्च न जुटा पाने के कारण विदेश में फंसे रहते हैं।
ऐसे लोगों की घर वापसी में सहायता करना भी उनकी मानवीय सेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
वरिष्ठ नागरिकों और समाज के कमजोर वर्गों पर भी ध्यान
समाज सेवा का एक और महत्वपूर्ण पक्ष बुजुर्गों और कमजोर वर्गों की देखभाल है। उम्र बढ़ने के साथ आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था भी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
ट्रस्ट की गतिविधियों में ऐसे वर्गों तक सहायता पहुंचाने की कोशिशें भी शामिल रही हैं, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा की सुविधाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
सिर्फ दान नहीं, सेवा की सोच
एस.पी. सिंह ओबेरॉय की कहानी की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल आर्थिक सहायता देने की बात नहीं आती। उनकी पहल में चिकित्सा केंद्र, डायलिसिस यूनिट, जांच सुविधाएं, शिक्षा सहायता और विदेशों में संकटग्रस्त भारतीयों की मदद जैसे स्थायी प्रयास भी दिखाई देते हैं।
यही वजह है कि उनकी पहचान सिर्फ एक दानदाता के रूप में नहीं, बल्कि सेवा को संस्थागत रूप देने वाले व्यक्ति के तौर पर भी बनी है।
उनका जीवन इस सवाल का जवाब देता नजर आता है कि बड़ी आर्थिक सफलता का समाज के प्रति इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
दौलत से बड़ी बनाई इंसानियत
एस.पी. सिंह ओबेरॉय की जीवन यात्रा कई मायनों में प्रेरणादायक है। एक साधारण मैकेनिक के रूप में शुरुआत करने वाला व्यक्ति कारोबार की दुनिया में सफल हुआ और फिर उसने अपनी आर्थिक क्षमता को समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया।
मृत्युदंड का सामना कर रहे भारतीयों की सहायता से लेकर डायलिसिस और चिकित्सा सेवाओं तक, शिक्षा से लेकर गरीब परिवारों की मदद तक और विदेशों में फंसे भारतीयों की घर वापसी से लेकर शहीद परिवारों के सहयोग तक—उनकी सेवा यात्रा का दायरा काफी व्यापक है।
आज जब सफलता को अक्सर संपत्ति, कारोबार और निजी उपलब्धियों से मापा जाता है, ऐसे में एसपी सिंह ओबेरॉय की कहानी एक अलग पैमाना सामने रखती है।
यह पैमाना पूछता है—आपने कितना कमाया नहीं, बल्कि यह कि आपकी सफलता से कितने लोगों के जीवन में बदलाव आया?
इसी सोच के साथ ‘सरबत दा भला’ की भावना उनके सामाजिक कार्यों का आधार बनी हुई है।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली
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