सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षा बजट पर संजय सिंह के सवाल, याचिका समिति से जांच की मांग
दीप सिंह, लखनऊ मुख्य संवाददाता, दैनिक रुस्तम-ए-हिंद
लखनऊ, 26 अगस्त 2026। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश समेत देशभर के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षा योजनाओं के बजट के कम इस्तेमाल और पीएम-पोषण योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस संबंध में राज्यसभा की याचिका समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है और सरकारी स्कूलों की स्थिति तथा सार्वजनिक धन के इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
संजय सिंह ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में बड़ी संख्या में गरीब और वंचित परिवारों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसे में स्कूलों में बिजली, पेयजल, शौचालय, इंटरनेट, कंप्यूटर, पुस्तकालय और पौष्टिक भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।
शिक्षा योजनाओं के बजट के कम इस्तेमाल पर सवाल
संजय सिंह ने अपनी शिकायत में दिए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए शिक्षा योजनाओं के लिए निर्धारित बजट के कम उपयोग पर सवाल उठाया। उनके मुताबिक, विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की पांच केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए ₹62,660 करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले 13 फरवरी 2026 तक केवल ₹32,296.54 करोड़ खर्च किए गए थे।
उन्होंने समग्र शिक्षा योजना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस योजना के लिए ₹41,250 करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले करीब 54.9 प्रतिशत धनराशि ही उपयोग की गई। संजय सिंह ने सवाल उठाया कि जब सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरत है, तब शिक्षा के लिए उपलब्ध बजट का पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है।
यूपी में ₹9,103 करोड़ खर्च नहीं होने का दावा
संजय सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2019-20 से 2021-22 के दौरान करीब ₹9,103 करोड़ की धनराशि खर्च नहीं की गई। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा के लिए उपलब्ध धनराशि का पूरा उपयोग नहीं हो रहा है।
उन्होंने इसी मुद्दे को लेकर सरकार और संबंधित विभागों से जवाबदेही तय करने की मांग की। उनका कहना है कि स्कूलों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार योजनाओं का बजट खर्च किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
यूपी के हजारों सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी
शिकायत में UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
दावा किया गया है कि प्रदेश के 26,151 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन नहीं है। वहीं 1,31,609 विद्यालयों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है।
इसके अलावा 1,01,407 विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम के लिए कार्यशील कंप्यूटर नहीं होने का दावा किया गया है। इसी तरह 63,590 विद्यालयों में खेल का मैदान नहीं होने की बात शिकायत में कही गई है।
संजय सिंह ने स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए जरूरी स्वच्छता सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। शिकायत के मुताबिक, 6,460 विद्यालयों में बालिका शौचालय और 5,054 विद्यालयों में बालक शौचालय कार्यशील नहीं हैं।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि 76,743 विद्यालयों में रैंप उपलब्ध नहीं हैं। संजय सिंह ने इन आंकड़ों को सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति से जोड़ते हुए व्यापक जांच की जरूरत बताई।
पीएम-पोषण योजना पर भी संजय सिंह ने उठाए सवाल
संजय सिंह ने पीएम-पोषण योजना को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए ₹12,500 करोड़ का आवंटन किया गया था, लेकिन 13 फरवरी 2026 तक ₹6,639.22 करोड़ ही खर्च किए गए थे।
उन्होंने स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और योजना के वास्तविक लाभार्थियों की संख्या की नियमित निगरानी की मांग की। साथ ही उन्होंने पीएम-पोषण योजना का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी रखी।
संजय सिंह ने लखीमपुर खीरी और सीतापुर में मिड-डे मील से संबंधित सामने आई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि भोजन की गुणवत्ता, खाद्यान्न की उपलब्धता, बच्चों की उपस्थिति और योजना पर हुए खर्च का वास्तविक मिलान कराया जाना चाहिए।
हरदोई मामले की निष्पक्ष जांच की मांग
संजय सिंह ने हरदोई मामले को लेकर भी जांच की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी, संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी और अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की।
उन्होंने शिकायतकर्ताओं से संबंधित FIR, शिकायतों, वीडियो और निरीक्षण रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की। संजय सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने रखने वाले नागरिकों और कार्यकर्ताओं को किसी भी तरह से दबाया नहीं जाना चाहिए।
उनका कहना है कि यदि किसी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी है या सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
याचिका समिति से कई बिंदुओं पर जांच की मांग
संजय सिंह ने राज्यसभा की याचिका समिति से सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे का राज्यवार आकलन कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने समग्र शिक्षा और पीएम-पोषण योजना के बजट के आवंटन तथा उसके इस्तेमाल की विस्तृत रिपोर्ट मंगाने की मांग की।
उन्होंने पीएम-पोषण योजना के स्वतंत्र ऑडिट के साथ-साथ स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का भी मूल्यांकन कराने की मांग रखी है।
संजय सिंह के मुताबिक, केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं है। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि निर्धारित धनराशि सही समय पर और सही उद्देश्य के लिए खर्च हो तथा उसका लाभ सीधे विद्यार्थियों तक पहुंचे।
बच्चों की शिक्षा और पोषण पर खर्च होने वाला पैसा जनता का है
संजय सिंह ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और पोषण पर खर्च होने वाला प्रत्येक रुपया जनता का पैसा है। इसलिए इसके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों को विज्ञापनों में स्मार्ट दिखाने के बजाय जमीन पर बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को बेहतर सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है। स्कूलों में बिजली, इंटरनेट, कंप्यूटर, शौचालय, पेयजल, खेल और दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है।
संजय सिंह की शिकायत के बाद अब याचिका समिति के स्तर पर इन मुद्दों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी। उनके द्वारा उठाए गए सवालों में शिक्षा बजट के उपयोग, सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और पीएम-पोषण योजना की निगरानी से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली

