1546 करोड़ के टेंडर में कथित गड़बड़ी, सत्येंद्र जैन गिरफ्तार; जानिए क्या हैं आरोप
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 18 अगस्त 2026 को हुई। ACB के मुताबिक, इस मामले में सत्येंद्र जैन समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन के लिए जारी करीब 1,546.32 करोड़ रुपये के टेंडर से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में कथित तौर पर इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक खास कंपनी यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को फायदा पहुंच सके।
22 महीने बाद फिर गिरफ्तारी
सत्येंद्र जैन इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में जेल में रहे थे। अक्टूबर 2024 में जमानत मिलने के बाद वह तिहाड़ जेल से बाहर आए थे। अब करीब 22 महीने बाद ACB ने उन्हें एक अलग मामले में गिरफ्तार किया है।
ACB के अनुसार, नया मामला 11 मई 2024 को दर्ज FIR नंबर 10/2024 से जुड़ा है। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ IPC की धाराएं भी लगाई गई हैं। मामला दिल्ली सरकार के विजिलेंस डायरेक्टोरेट की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।
क्या है 1546 करोड़ के टेंडर का मामला?
जांच एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन के लिए तैयार किए गए टेंडर में जानबूझकर बदलाव किए गए। आरोप है कि जरूरी पायलट स्टडी नहीं कराई गई और ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता से जुड़े कुछ जरूरी मानकों को टेंडर से हटा दिया गया।
ACB का दावा है कि तकनीकी शर्तों में बदलाव का फायदा यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को पहुंचा। एजेंसी के मुताबिक, इन बदलावों के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
छह लोगों की गिरफ्तारी
इस मामले में ACB ने सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, तत्कालीन कॉन्ट्रैक्ट कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट के मालिक राजा कुमार कुर्रा और श्रीजनहार के मालिक पंकज वर्मा को गिरफ्तार किया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित रिश्वत की रकम कुछ बिचौलिया कंपनियों के जरिए आगे पहुंचाई गई। ACB सूत्रों का दावा है कि उदित प्रकाश राय और उनके परिजनों के बैंक खातों में करीब 1.52 करोड़ रुपये पहुंचे थे। एजेंसी के मुताबिक, यह रकम यूरोटेक से एएन एंटरप्राइजेज के जरिए पहुंची और इसका इस्तेमाल संपत्ति खरीदने में किया गया।
2021 में शुरू हुई थी टेंडर प्रक्रिया
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, STP अपग्रेडेशन की प्रक्रिया अक्टूबर 2021 में शुरू हुई थी। 7 अक्टूबर 2021 को आईएफएएस तकनीक प्रस्तावित की गई और 14 अक्टूबर को तत्कालीन जल मंत्री सत्येंद्र जैन से इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिली।
दिसंबर 2021 में हुई बैठकों में सत्येंद्र जैन, तत्कालीन कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव और तत्कालीन CEO उदित प्रकाश राय शामिल हुए। इसके बाद 28 दिसंबर 2021 को टेंडर की अनुमानित लागत 1,546.32 करोड़ रुपये तय की गई। इस परियोजना में प्लांट की क्षमता 215 MGD से बढ़ाकर 297 MGD करने का प्रस्ताव था।
टेंडर जारी होने से पहले गोपनीय दस्तावेज साझा करने का आरोप
ACB सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान मिले डिजिटल सबूतों में व्हाट्सऐप चैट भी सामने आई हैं। एजेंसी का दावा है कि टेंडर आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही उसकी गोपनीय शर्तें और ड्राफ्ट दस्तावेज कुछ आरोपियों के फोन पर साझा किए जा रहे थे।
17 मई 2022 को टेंडर की तकनीकी बिड खोली गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में सत्येंद्र जैन और उदित प्रकाश राय की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जैन की गिरफ्तारी के समय क्या स्थिति थी?
गौर करने वाली बात यह है कि टेंडर से जुड़े कई अहम फैसले अक्टूबर से दिसंबर 2021 के बीच लिए गए थे। सत्येंद्र जैन को एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया गया था, यानी टेंडर प्रक्रिया के शुरुआती और अहम फैसले उनकी उस गिरफ्तारी से पहले लिए गए थे।
इस मामले में ACB की जांच अभी जारी है और एजेंसी टेंडर प्रक्रिया, कथित वित्तीय लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
रिपोर्टर: जसलीन कौर

