Varanasi Ganga Aarti: 64 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर लौटी विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती, दीपों की रोशनी से जगमगाई काशी
उपशीर्षक: वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण 64 दिनों से बदले हुए स्थान पर हो रही विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती एक बार फिर दशाश्वमेध घाट के पारंपरिक स्थल पर शुरू हुई। श्रद्धालुओं में उत्साह, वैदिक मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी से भक्तिमय हुआ वातावरण।
वाराणसी, उत्तर प्रदेश | 21 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती एक बार फिर अपने पारंपरिक स्वरूप में लौट आई है। गंगा नदी में बाढ़ और जलस्तर बढ़ने के कारण पिछले 64 दिनों से दशाश्वमेध घाट पर अपने निर्धारित स्थान से हटकर आयोजित की जा रही आरती मंगलवार शाम दोबारा घाट के पारंपरिक स्थल पर संपन्न हुई।
इस अवसर पर दशाश्वमेध घाट का नजारा बेहद भव्य और आकर्षक दिखाई दिया। मां गंगा की आरती के दौरान दीपों की रोशनी, शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
लंबे अंतराल के बाद घाट पर आरती का आयोजन होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
64 दिनों बाद पारंपरिक स्थान पर लौटी गंगा आरती
वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर आयोजित होने वाली गंगा आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस धार्मिक आयोजन को देखने पहुंचते हैं।
लेकिन इस वर्ष मानसून के दौरान गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से घाट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया था।
इसके कारण गंगा सेवा निधि को आरती के आयोजन स्थल में बदलाव करना पड़ा।
अब 64 दिनों के लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को गंगा आरती फिर से घाट के पारंपरिक स्थान पर आयोजित की गई।
17 अगस्त से कार्यालय की छत पर हो रही थी आरती
जानकारी के अनुसार, गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण 17 अगस्त 2026 से गंगा सेवा निधि द्वारा आरती का आयोजन कार्यालय की छत पर किया जा रहा था।
बाढ़ के कारण घाट पर नियमित रूप से आरती करना संभव नहीं रह गया था। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आयोजन की निरंतरता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्थान चुना गया।
हालांकि, आयोजन स्थल बदलने के बावजूद मां गंगा की आरती नियमित रूप से जारी रही।
गंगा सेवा निधि के पदाधिकारियों और अर्चकों ने निर्धारित परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और आरती का क्रम बनाए रखा।
दशाश्वमेध घाट पर फिर दिखा भव्य नजारा
मंगलवार शाम जैसे ही दशाश्वमेध घाट पर पारंपरिक तरीके से आरती शुरू हुई, श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला।
अर्चकों ने निर्धारित विधि-विधान से मां गंगा की पूजा की और दीपों के माध्यम से आरती संपन्न कराई।
इस दौरान घाट पर मौजूद श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में डूबे नजर आए।
आरती के समय शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
लंबे समय बाद घाट पर लौटे इस आयोजन ने वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
श्रद्धालुओं में दिखा विशेष उत्साह
दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती के दोबारा शुरू होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों में खुशी का माहौल दिखाई दिया।
बड़ी संख्या में लोग मां गंगा की आरती में शामिल होने पहुंचे।
कई श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर विशेष रहा, क्योंकि लंबे समय से घाट पर पारंपरिक स्थान पर आरती का आयोजन नहीं हो पा रहा था।
गंगा आरती देखने आए लोगों ने धार्मिक वातावरण का आनंद लिया और मां गंगा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष ने दी जानकारी
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण 64 दिनों तक कार्यालय की छत पर आरती का आयोजन करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि अब परिस्थितियों में सुधार होने के बाद आरती को फिर से दशाश्वमेध घाट के पारंपरिक स्थान पर शुरू किया गया है।
हालांकि, गंगा नदी का जलस्तर अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है।
इस कारण घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सावधानी बरतने की आवश्यकता बनी हुई है।
अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ गंगा का जलस्तर
गंगा आरती अपने पारंपरिक स्थान पर लौट आई है, लेकिन नदी का जलस्तर अभी पूरी तरह सामान्य नहीं बताया जा रहा है।
मानसून के दौरान गंगा में पानी बढ़ने से वाराणसी के कई घाट प्रभावित हुए थे।
नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों की सीढ़ियां और अन्य हिस्से जलमग्न हो गए थे, जिससे धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर असर पड़ा।
अब पानी कम होने के साथ घाटों पर गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं।
हालांकि, नदी के किनारे फिसलन और पानी की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।
विश्वभर में प्रसिद्ध है काशी की गंगा आरती
वाराणसी की गंगा आरती केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।
दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन शाम को आयोजित होने वाली आरती को देखने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशी पर्यटक भी पहुंचते हैं।
आरती के दौरान अर्चक विशेष परिधान पहनकर निर्धारित क्रम में दीप प्रज्वलित करते हैं।
शंख, घंटियों, धूप और दीपों के साथ मां गंगा की आराधना की जाती है।
इस आयोजन का दृश्य वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
काशी के पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण आयोजन
वाराणसी देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है।
काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा नदी, ऐतिहासिक घाट और धार्मिक परंपराएं यहां आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण हैं।
दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती शहर के पर्यटन से भी जुड़ी हुई है।
आरती देखने आने वाले पर्यटकों से स्थानीय नाविकों, दुकानदारों, होटल व्यवसायियों और अन्य पर्यटन सेवाओं को भी आर्थिक गतिविधियों के अवसर मिलते हैं।
ऐसे में आरती का अपने पारंपरिक स्थान पर लौटना धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाढ़ के दौरान भी नहीं रुकी मां गंगा की आराधना
गंगा का जलस्तर बढ़ने के बावजूद गंगा सेवा निधि ने आरती की परंपरा को जारी रखा।
भले ही आयोजन स्थल बदलना पड़ा, लेकिन मां गंगा की आराधना निर्धारित क्रम में होत

