केरल की अर्थव्यवस्था को क्यों चाहिए मनमोहन सिंह जैसे सुधार? CM सतीशन ने बताया
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास मॉडल में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। 17 सितंबर 2026 को इंडिया टुडे राउंडटेबल ‘केरलम’ में उन्होंने 1991 के आर्थिक सुधारों का उदाहरण देते हुए कहा कि केरल को पारंपरिक तौर-तरीकों से आगे बढ़कर सुधारों का नया दौर शुरू करना होगा, जिसमें निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी भी शामिल है। AajTak
1991 के सुधारों से तुलना
कार्यक्रम में सतीशन से पूछा गया कि क्या वह खुद को 1991 के आर्थिक सुधारों के दौर के तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समकक्ष मानते हैं और क्या उनकी सरकार PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए केरल के विकास मॉडल में बुनियादी बदलाव करने की तैयारी कर रही है।
सतीशन ने बताया कि राज्य के प्लानिंग बोर्ड के उपाध्यक्ष, जो पूर्व कैबिनेट सचिव हैं, ने प्लानिंग बोर्ड की पहली बैठक में उनसे कहा था कि उनकी स्थिति 1991 में मनमोहन सिंह जैसी है। सतीशन के मुताबिक, सरकार राज्य में विकास और निवेश के तरीके को बदलना चाहती है। AajTak
‘पारंपरिक तौर-तरीकों से हटना होगा’
सतीशन ने कहा कि केरल को कई चीजों में बदलाव करना होगा और पारंपरिक तौर-तरीकों से हटकर नए सुधार लागू करने होंगे। उन्होंने माना कि राज्य ने इस दिशा में कदम उठाने में देरी की है, लेकिन उनके मुताबिक अभी बहुत देर नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई करने का सही समय है और यदि केरल अब भी बदलाव नहीं करता तो भविष्य में राज्य मुश्किल स्थिति में पहुंच सकता है। उनके अनुसार सरकार सार्वजनिक खर्च, बुनियादी ढांचे, निजी निवेश और प्रशासनिक सुधारों को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है। AajTak
जमीन की कमी और नियम बड़ी चुनौती
सतीशन ने केरल की भौगोलिक और नियामकीय सीमाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने पश्चिमी घाट, वन कानूनों, धान की जमीन से जुड़े नियमों और कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ) के नियमों के कारण जमीन के इस्तेमाल पर मौजूद पाबंदियों को रेखांकित किया।
उनके अनुसार केरल की बड़ी मात्रा में जमीन विभिन्न नियमन के दायरे में आती है और राज्य का जनसंख्या घनत्व भी काफी अधिक है। इन परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। AajTak
600 किमी तटरेखा और बंदरगाहों पर फोकस
इसके साथ ही सतीशन ने केरल की भौगोलिक और बुनियादी ढांचे की संभावनाओं को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य के पास करीब 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा, दो अंतरराष्ट्रीय समुद्री बंदरगाह, एक कंटेनर टर्मिनल और 18 छोटे बंदरगाह हैं।
सरकार इन सभी संसाधनों को एकीकृत कर केरल को बंदरगाह आधारित आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। सतीशन ने कहा कि सरकार ने सभी बंदरगाहों को एकीकृत करने और पूरे केरल को एक तरह के ‘पोर्ट सिटी’ के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना घोषित की है। AajTak
विमानन और नए तकनीकी क्षेत्र
सतीशन ने विमानन क्षेत्र को भी आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके मुताबिक केरल में चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं और सरकार को निवेश में रुचि रखने वाले प्रस्ताव मिल रहे हैं। राज्य के विमानन बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है। AajTak
इसके अलावा सरकार सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) और डेटा सेंटर जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना चाहती है।
उन्होंने तिरुवनंतपुरम के टेक्नोपार्क, कोच्चि के इन्फोपार्क और कोझिकोड के साइबरपार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इन तकनीकी केंद्रों के विस्तार की दिशा में भी काम करना चाहती है। AajTak
स्रोत: आजतक की पूरी रिपोर्ट पढ़ें
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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