CM सुक्खू का केंद्र पर बड़ा सवाल, फोरलेन परियोजनाओं की जमीन अधिग्रहण लागत को लेकर उठाएंगे मुद्दा
शिमला, 28 अगस्त 2026। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य में प्रस्तावित फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की लागत को लेकर केंद्र सरकार के सामने मामला उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि शिमला-मटौर समेत अन्य फोरलेन परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का खर्च राज्य सरकार पर डालने की नई शर्त को लेकर केंद्र से पुनर्विचार का आग्रह किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था के तहत अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की राशि जमीन के मूल्य की चार गुना तक हो सकती है। ऐसे में राज्य सरकार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका है। सुक्खू ने विधानसभा में इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार केंद्र के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी।
शिमला-मटौर फोरलेन को लेकर सरकार की चिंता
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना का जिक्र किया। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की है, जबकि इन सड़कों पर टोल भी वसूला जाता है।
सुक्खू ने सवाल उठाया कि यदि फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का पूरा आर्थिक बोझ राज्य सरकार को उठाना है, तो राज्य को इन परियोजनाओं से मिलने वाले राजस्व और टैक्स में उचित हिस्सेदारी क्यों नहीं मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस व्यवस्था को लेकर केंद्र से पुनर्विचार का अनुरोध करेगी। सरकार का तर्क है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जमीन अधिग्रहण की लागत सामान्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।
जमीन के मुआवजे से बढ़ेगा राज्य पर वित्तीय बोझ
फोरलेन परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण लंबे समय से हिमाचल में महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। पहाड़ी इलाकों में जमीन की उपलब्धता सीमित होने के साथ-साथ कई स्थानों पर जमीन की कीमत भी काफी अधिक है।
नई शर्त के तहत यदि राज्य को अधिग्रहण की लागत वहन करनी पड़ती है तो राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने इसी वजह से केंद्र सरकार से इस व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग करने की बात कही है।
NHAI बनाएगा सड़क और वसूलेगा टोल
मुख्यमंत्री सुक्खू ने विधानसभा में यह भी कहा कि फोरलेन हाईवे का निर्माण NHAI करता है और इन सड़कों पर टोल वसूली की व्यवस्था भी प्राधिकरण के माध्यम से होती है।
ऐसे में राज्य सरकार का सवाल है कि यदि जमीन अधिग्रहण के लिए भी राज्य को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी, तो परियोजनाओं से मिलने वाले आर्थिक लाभ में हिमाचल की हिस्सेदारी को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
सरकार का मानना है कि राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए इतनी बड़ी लागत को अकेले वहन करना आसान नहीं होगा।
फोरलेन से कनेक्टिविटी और पर्यटन को फायदा
हिमाचल प्रदेश में फोरलेन परियोजनाओं को राज्य की कनेक्टिविटी और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बेहतर सड़क संपर्क से शिमला, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और अन्य पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
फोरलेन सड़कों से स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और कारोबारियों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती है। इससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हालांकि, परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की लागत एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सरकार विकास परियोजनाओं को रोकना नहीं चाहती
मुख्यमंत्री के रुख से यह संकेत मिलता है कि हिमाचल सरकार फोरलेन परियोजनाओं के खिलाफ नहीं है, बल्कि भूमि अधिग्रहण की वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर केंद्र के साथ स्पष्ट व्यवस्था चाहती है।
सरकार का प्रयास है कि सड़क परियोजनाएं आगे बढ़ें, लेकिन इसके लिए राज्य के वित्तीय हितों की भी रक्षा हो। इसी उद्देश्य से केंद्र के सामने यह मामला उठाने की तैयारी की जा रही है।
चार लेन हाईवे की स्पीड लिमिट भी बढ़ सकती है
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने हिमाचल के फोरलेन हाईवे पर वाहनों की गति सीमा को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। राज्य में मौजूदा 60 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा को बढ़ाकर 70 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से सर्वे किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गति बढ़ाने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा न बढ़े।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल आने वाले बड़ी संख्या में पर्यटक दूसरे राज्यों से होते हैं और कई बार उन्हें स्थानीय गति सीमा की जानकारी नहीं होती। इसके कारण ओवरस्पीडिंग के चालान भी बड़ी संख्या में जारी होते हैं।
राज्य में सड़क सुरक्षा पर भी फोकस
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। फोरलेन सड़कों के निर्माण के बाद यातायात की गति बढ़ी है, लेकिन पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखना जरूरी है।
इसीलिए गति सीमा बढ़ाने से पहले सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य वाहन चालकों को बेहतर सुविधा देने के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित रखना है।
बिजली व्यवस्था को लेकर भी विधानसभा में जवाब
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने चंबा के चुराह विधानसभा क्षेत्र में पेड़ों से लटक रहे बिजली के तारों से जुड़े सवाल पर भी जवाब दिया। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही और कहा कि राज्य सरकार पूरे हिमाचल में गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।
सरकार का कहना है कि दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को मजबूत करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
नए एथेनॉल प्लांट पर भी सरकार का फैसला
हिमाचल विधानसभा में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि राज्य में नए एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार के मुताबिक, एक एथेनॉल प्लांट प्रतिदिन लगभग 5 से 10 लाख लीटर पानी की खपत कर सकता है।
सरकार ने पानी की खपत और संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए नए एथेनॉल प्लांट नहीं लगाने का फैसला बताया है। साथ ही अधिक बिजली खपत करने वाले और खतरनाक कचरा पैदा करने वाले उद्योगों को लेकर भी सख्त नीति अपनाने की बात कही गई है।
रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए मुफ्त HRTC यात्रा
रक्षाबंधन के मौके पर हिमाचल सरकार ने महिलाओं के लिए HRTC बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी घोषित की। इसके अलावा मुख्यमंत्री सुक्खू ने रक्षाबंधन के दिन सरकारी कर्मचारियों के लिए राजपत्रित अवकाश की घोषणा की, जिसमें आवश्यक सेवाओं को अपवाद रखा गया है।
यह फैसला महिलाओं को त्योहार के दौरान अपने परिवारों और रिश्तेदारों तक आसानी से पहुंचने में मदद करने के उद्देश्य से लिया गया है।
हिमाचल के लिए विकास और वित्तीय संतुलन बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के सामने राज्य में विकास परियोजनाओं को गति देने के साथ-साथ वित्तीय संसाधनों का संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
फोरलेन परियोजनाएं हिमाचल के लिए लंबे समय में कनेक्टिविटी और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन भूमि अधिग्रहण की लागत राज्य के लिए बड़ा वित्तीय मुद्दा बन सकती है।
इसी कारण मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सामने यह मामला उठाने का फैसला किया है। अब देखना होगा कि केंद्र और राज्य के बीच भूमि अधिग्रहण की लागत को लेकर किस तरह की व्यवस्था बनती है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में फोरलेन परियोजनाओं की भूमि अधिग्रहण लागत को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का रुख आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकता है। राज्य सरकार का कहना है कि यदि उसे जमीन अधिग्रहण का भारी खर्च उठाना पड़ता है, तो फोरलेन से होने वाले राजस्व में राज्य की हिस्सेदारी पर भी विचार होना चाहिए।
इसके साथ ही सरकार फोरलेन हाईवे की गति सीमा बढ़ाने, सड़क सुरक्षा सुधारने, नए एथेनॉल प्लांट पर रोक और महिलाओं के लिए मुफ्त HRTC यात्रा जैसे कई मुद्दों पर भी फैसले ले रही है। इन फैसलों का असर राज्य के बुनियादी ढांचे, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और आम लोगों की सुविधाओं पर पड़ सकता है।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली

