बरेली में फर्जी डॉक्टर बनकर Instagram से बेच रहे थे नकली शक्तिवर्धक दवाएं, 2 गिरफ्तार
बरेली: सोशल मीडिया पर बीमारी का इलाज या किसी स्वास्थ्य समस्या का समाधान तलाशते समय सावधानी बेहद जरूरी है। बरेली में पुलिस ने ऐसे कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो Instagram के जरिए लोगों को शक्तिवर्धक दवाओं के नाम पर भ्रमित कर कथित नकली दवाएं बेच रहा था। आरोपी खुद को डॉक्टर और पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ बताते थे।
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों समीरुद्दीन (24) और यूसुफ (25) को गिरफ्तार किया है। वहीं, यूसुफ का भाई इलियास खान पुलिस की कार्रवाई के दौरान मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
Instagram पर बनाई ‘Herbal and Jari Booti’ की पहचान
पुलिस जांच के मुताबिक गिरोह सोशल मीडिया पर ‘Herbal and Jari Booti’ नाम से पहचान बनाकर लोगों तक पहुंचता था। Instagram पर विज्ञापन के जरिए पुरुषों की यौन कमजोरी दूर करने का दावा किया जाता था। इसके बाद ग्राहक संपर्क करते तो आरोपी फोन पर खुद को डॉक्टर या वरिष्ठ पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ बताकर बातचीत करते थे।
पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में आठवीं कक्षा तक पढ़ा समीरुद्दीन डॉक्टर बनकर ग्राहकों से बात करता था। वह उनकी समस्या सुनने के बाद कथित दवाओं की जानकारी देता और फिर ऑनलाइन ऑर्डर बुक करता था।
250 से 300 रुपये में लिया जाता था ऑर्डर
पुलिस के मुताबिक ग्राहकों से एक ऑर्डर के लिए करीब 250 से 300 रुपये या उससे अधिक UPI के जरिए बैंक खातों में जमा कराए जाते थे। भुगतान मिलने के बाद दवाओं को पार्सल के माध्यम से ग्राहकों के पते पर भेज दिया जाता था।
पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा था। Instagram से ग्राहक तलाशे जाते, फोन पर उनसे बातचीत की जाती, UPI से भुगतान लिया जाता और फिर पार्सल के जरिए कथित दवाओं की सप्लाई की जाती थी।
घर में बना रखा था कथित पैकिंग सेंटर
पुलिस को सूचना मिली थी कि इज्जतनगर थाना क्षेत्र की राजीव एन्क्लेव कॉलोनी स्थित एक मकान में कथित तौर पर कॉल सेंटर चलाया जा रहा है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने देखा कि एक व्यक्ति कंप्यूटर पर ग्राहकों का डेटा संभाल रहा था, जबकि दूसरा खाली कैप्सूल में पाउडर भरकर उन्हें पैक कर रहा था।
पुलिस ने मौके से छह कंप्यूटर, आठ मॉनिटर, एक लैपटॉप, तीन प्रिंटर, एक स्कैनर और 12 मोबाइल फोन बरामद किए। इसके अलावा कथित नकली दवाओं के 85 पैकेट, पैकिंग सामग्री और अन्य सामान भी मिला।
फर्जी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस भी मिला
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने अपने कथित कारोबार को वैध दिखाने के लिए एक फर्जी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस भी तैयार कर रखा था। पुलिस को एक फर्जी फर्म से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस के मुताबिक गिरोह देवचंदनिया इलाके में एक दुकान भी संचालित करता था। पुलिस दुकान, मकान और ऑनलाइन नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
सहारनपुर और मुरादाबाद से लाते थे कच्चा माल
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे सहारनपुर और मुरादाबाद के खुले बाजारों से सस्ता पाउडर और अन्य कच्चा माल खरीदते थे। इसके बाद उसे खाली कैप्सूल में भरकर पैक किया जाता था।
पुलिस का आरोप है कि तैयार पैकेटों को फर्जी नाम और दावों के साथ ग्राहकों को बेचा जाता था। अब पुलिस कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले लोगों और कथित सप्लायरों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
1.99 लाख रुपये और 14 ATM कार्ड बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को 1.99 लाख रुपये नकद, छह चेकबुक और 14 ATM कार्ड भी मिले हैं। इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड और कथित फर्जी लाइसेंस सहित कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित ऑनलाइन कारोबार से कितनी रकम जुटाई गई और पैसे का लेनदेन किन-किन लोगों के बीच हुआ।
करीब एक साल से सक्रिय होने का दावा
पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित गिरोह करीब एक साल से सक्रिय था और पार्सल के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में दवाएं भेजी जाती थीं।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फरार आरोपी इलियास खान की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। साथ ही कथित गिरोह के अन्य सदस्यों और सप्लायरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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