उमर अब्दुल्ला सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारी, तीन खाली पदों को भरने पर नजर
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी सरकार की टीम में बदलाव करने की तैयारी में हैं। सरकार के दो साल पूरे होने से पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल और खाली पड़े मंत्री पदों को भरने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस संभावित बदलाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ कांग्रेस की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उमर अब्दुल्ला सरकार 16 अक्टूबर को अपने दो साल पूरे करने जा रही है। इससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। हालांकि, नए मंत्रियों के नाम और फेरबदल की तारीख को लेकर अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फारूक अब्दुल्ला से चर्चा करेंगे उमर अब्दुल्ला
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और अपने पिता फारूक अब्दुल्ला से मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
उनके इस बयान के बाद मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी नेतृत्व के साथ होने वाली चर्चा में खाली पदों को भरने, नए चेहरों को जिम्मेदारी देने और सरकार की टीम में बदलाव जैसे मुद्दों पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, अभी तक किसी नए मंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर क्या निर्णय लेता है।
मंत्रिमंडल में तीन पद खाली, दावेदारों की संख्या ज्यादा
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। नियमानुसार, मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम नौ सदस्य हो सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी और चार अन्य मंत्री मंत्रिपरिषद में शामिल हैं। इस तरह तीन पद खाली हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई विधायक मंत्री बनने की उम्मीद लगाए हुए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने नए चेहरों को मौका देने के साथ वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाओं को संतुलित करने की चुनौती है। मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बंटवारे पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
कांग्रेस की सरकार में शामिल होने पर भी नजर
नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने 2024 का विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था। हालांकि, कांग्रेस ने उमर अब्दुल्ला सरकार में शामिल होने के बजाय बाहर रहने का फैसला किया था। कांग्रेस का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल होने तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी।
ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस की भागीदारी को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि कांग्रेस अपने रुख पर कायम रहती है, तो मंत्रिमंडल में नए सदस्यों को शामिल करने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों पर ही अधिक ध्यान दिया जा सकता है।
अगले सप्ताह हो सकता है बड़ा फैसला
10 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल विस्तार अगले सप्ताह होने की संभावना है। हालांकि, पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए मंत्रियों के नाम और मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ विभागों के पुनर्वितरण की संभावना भी जताई जा रही है। कुछ मंत्रियों के पास एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी है, इसलिए फेरबदल के जरिए प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करने पर भी विचार किया जा सकता है।
फिलहाल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व के बीच होने वाली चर्चा के बाद ही तस्वीर साफ होगी। सरकार के दो साल पूरे होने से पहले होने वाली इस कवायद पर पार्टी विधायकों और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।


