लखीमपुर खीरी हिंसा केस: आशीष मिश्रा को दिवाली पर घर जाने की सुप्रीम कोर्ट से अनुमति, सुनवाई में जज के तबादले का मुद्दा उठा
2021 के किसान आंदोलन से जुड़े हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत; सुनवाई के दौरान गवाह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया पर भी हुई चर्चा
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से दिवाली के दौरान अपने घर लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति मिली है। वर्ष 2021 में किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े इस मामले में सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने आशीष मिश्रा को त्योहार के अवसर पर घर जाने की राहत दी। इसके साथ ही मामले की निचली अदालत में चल रही सुनवाई, न्यायाधीश के तबादले और एक गवाह के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट का मुद्दा भी सामने आया।
आशीष मिश्रा केंद्रीय मंत्री रह चुके अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में वह आरोपियों में शामिल हैं। यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत है और इसकी सुनवाई को लेकर विभिन्न अवसरों पर सुप्रीम कोर्ट में भी कार्यवाही हुई है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिवाली के दौरान लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दिए जाने को आशीष मिश्रा के लिए अस्थायी राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस अनुमति का अर्थ यह नहीं है कि उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामले का निपटारा हो गया है या आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया गया है।
दिवाली पर लखीमपुर खीरी जाने की मिली अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हुई सुनवाई में आशीष मिश्रा को दिवाली के दौरान अपने घर लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी।
इससे पहले मामले में उनकी आवाजाही को लेकर अदालत की ओर से शर्तें निर्धारित की गई थीं।
अब त्योहार के अवसर पर घर जाने की अनुमति मिलने के बाद आशीष मिश्रा निर्धारित न्यायिक शर्तों के अनुसार लखीमपुर खीरी जा सकेंगे।
हालांकि अनुमति की सटीक अवधि और उससे जुड़ी सभी शर्तों की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत लिखित आदेश से ही होगी।
सुनवाई के दौरान जज के तबादले का मुद्दा उठा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने निचली अदालत में मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश के तबादले का मुद्दा उठाया।
प्रशांत भूषण ने न्यायाधीश के तबादले को सकारात्मक कदम बताया।
उन्होंने इससे पहले मामले की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता व्यक्त की थी और न्यायाधीश को बदलने की मांग की थी।
प्रशांत भूषण का तर्क था कि कुछ न्यायिक आदेशों और परिस्थितियों के कारण निष्पक्ष सुनवाई को लेकर सवाल पैदा हो सकते हैं।
हालांकि यह उनके द्वारा अदालत के समक्ष उठाई गई आपत्ति थी। किसी न्यायाधीश के खिलाफ पक्षपात का आरोप केवल अधिवक्ता के कथन के आधार पर स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
गवाह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान एक चश्मदीद गवाह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने का मुद्दा भी सामने आया।
प्रशांत भूषण के अनुसार, निचली अदालत ने मामले के एक गवाह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
उन्होंने कहा कि संबंधित गवाह ने बीमारी से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए थे, इसके बावजूद उसके खिलाफ वारंट जारी हुआ।
इस आधार पर प्रशांत भूषण ने न्यायिक प्रक्रिया और गवाहों से संबंधित आदेशों को लेकर चिंता व्यक्त की।
गैर-जमानती वारंट जारी करने की परिस्थितियों और संबंधित न्यायिक आदेश का अंतिम मूल्यांकन उपलब्ध रिकॉर्ड तथा सक्षम अदालत की कार्यवाही के आधार पर ही किया जा सकता है।
निष्पक्ष सुनवाई की मांग पर हुई चर्चा
लखीमपुर खीरी हिंसा मामला गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष सुनवाई, गवाहों की सुरक्षा और सभी पक्षों को कानूनी प्रक्रिया के अनुसार अवसर मिलना महत्वपूर्ण होता है।
प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान इन्हीं मुद्दों का उल्लेख किया।
उन्होंने पहले भी न्यायाधीश को बदलने की मांग की थी और आशंका जताई थी कि कुछ परिस्थितियां निष्पक्ष सुनवाई पर प्रश्न खड़े कर सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे का उठना मामले की न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा मामला?
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में 3 अक्टूबर 2021 को किसान आंदोलन के दौरान हिंसा हुई थी।
इस घटना में चार किसानों और एक पत्रकार सहित कुल आठ लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
किसानों को वाहन से कुचले जाने के आरोपों के संबंध में आशीष मिश्रा सहित अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
आशीष मिश्रा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
किसान आंदोलन के दौरान हुई थी घटना
वर्ष 2021 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में किसान आंदोलन चल रहा था।
इसी दौरान लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे किसानों से जुड़ी हिंसक घटना सामने आई।
घटना के बाद पुलिस जांच शुरू हुई और विभिन्न आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामला किसान आंदोलन से जुड़े सबसे चर्चित आपराधिक प्रकरणों में शामिल रहा है।
इस मामले में मृतकों के परिवारों, गवाहों और आरोपियों से जुड़े कानूनी अधिकारों को लेकर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
आशीष मिश्रा की जमानत और आवाजाही पर पहले भी हुई सुनवाई
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा की जमानत और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले भी सुनवाई हुई है।
अदालत ने विभिन्न चरणों में उनकी जमानत संबंधी शर्तों और आवाजाही से जुड़े प्रश्नों पर विचार किया है।
इस प्रकार के मामलों में अदालत आरोपी की स्वतंत्रता, न्यायिक प्रक्रिया और गवाहों से जुड़े पहलुओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती है।
सोमवार को दिवाली के दौरान घर जाने की अनुमति भी इसी लंबित न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत दी गई है।
मामले की सुनवाई अभी जारी
सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति के बावजूद लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की मूल आपराधिक कार्यवाही समाप्त नहीं हुई है।
निचली अदालत में मामले की सुनवाई और साक्ष्यों से संबंधित प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
गवाहों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अदालत आगे की कार्यवाही करेगी।
किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि या दोषमुक्ति का निर्णय न्यायालय के अंतिम आदेश से ही होगा।
गवाहों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
लखीमपुर खीरी हिंसा जैसे मामलों में चश्मदीद गवाहों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
न्यायिक प्रक्रिया में गवाहों को अदालत के समक्ष उपस्थित होने और अपने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाता है।
इसके साथ ही गवाहों की सुरक्षा, स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों और कानूनी अधिकारों का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है।
इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान एक गवाह के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट का मुद्दा उठाया गया।
इस विवाद पर आगे की न्यायिक कार्यवाही से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
दिवाली पर मिली राहत, लेकिन कानूनी प्रक्रिया जारी
सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश आशीष मिश्रा को दिवाली के दौरान अपने घर जाने की अनुमति देता है।
हालांकि इस राहत को मामले के आरोपों पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और सभी पक्षों के अधिकारों तथा दलीलों पर अदालत कानून के अनुसार विचार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली के दौरान लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी है। वहीं सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने न्यायाधीश के तबादले और एक गवाह के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट से जुड़े मुद्दे उठाए। वर्ष 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अंतिम न्यायिक निर्णय अभी आना बाकी है।

