जामिया में छात्र संघ चुनाव को लेकर विवाद तेज, तीन सांसदों के खिलाफ FIR, छात्रों का प्रदर्शन जारी
2006 से छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन, विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई; ऑनलाइन कक्षाओं के फैसले का भी विरोध
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026। दिल्ली की प्रतिष्ठित केंद्रीय यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पिछले करीब दो सप्ताह से जारी छात्र आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने तीन सांसदों सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस घटनाक्रम के बाद परिसर में छात्र राजनीति, लोकतांत्रिक अधिकारों और विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।
जामिया मिलिया इस्लामिया में वर्ष 2006 से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। लंबे समय से छात्र संगठन चुनाव बहाल करने की मांग उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में इस मांग को लेकर प्रदर्शन तेज हुआ है। आंदोलनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्र संघ चुनाव कराने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और समयसीमा घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शन के कारण शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने की बात कही है। वहीं छात्रों के एक वर्ग ने ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के फैसले का भी विरोध किया है।
तीन सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने तीन सांसदों और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
मामले में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और सहारनपुर से लोकसभा सांसद इमरान मसूद के नाम सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत में एक अन्य सांसद का नाम भी शामिल है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन से संबंधित गतिविधियों के कारण परिसर की सामान्य व्यवस्था और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हुए।
हालांकि प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ किसी व्यक्ति का दोषी साबित होना नहीं है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस करेगी और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
2006 से नहीं हुए छात्र संघ चुनाव
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है।
विश्वविद्यालय में आखिरी बार वर्ष 2006 में छात्र संघ चुनाव हुए थे। इसके बाद से चुनाव प्रक्रिया बहाल नहीं हो सकी।
छात्रों का कहना है कि निर्वाचित छात्र संघ विश्वविद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम होता है।
छात्र संघ के माध्यम से शिक्षा, छात्रावास, पुस्तकालय, फीस, परिसर की सुविधाओं और अन्य शैक्षणिक मुद्दों को संगठित तरीके से उठाया जा सकता है।
आंदोलनकारी छात्र इसी आधार पर चुनाव प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
दो सप्ताह से जारी है छात्रों का आंदोलन
जामिया परिसर में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर पिछले लगभग दो सप्ताह से प्रदर्शन जारी है।
प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से चुनाव बहाली को लेकर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।
छात्रों का कहना है कि लंबे समय से छात्र संघ चुनाव नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के कारण परिसर की सामान्य गतिविधियों और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर प्रशासन तथा छात्रों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं।
ऑनलाइन कक्षाओं के फैसले का विरोध
छात्र संघ चुनाव को लेकर जारी विवाद के बीच विश्वविद्यालय में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का मुद्दा भी सामने आया है।
छात्रों के एक वर्ग ने ऑनलाइन कक्षाओं के फैसले पर आपत्ति जताई है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि परिसर में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित रहनी चाहिए और छात्र संघ चुनाव से संबंधित मांगों पर प्रशासन को बातचीत करनी चाहिए।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक व्यवस्था को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
इस मुद्दे ने छात्र आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
कुलपति और रजिस्ट्रार ने छात्रों से की बातचीत
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, शनिवार को कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी के नेतृत्व में शिक्षकों तथा कर्मचारियों ने छात्रों से संवाद करने का प्रयास किया।
प्रशासन ने बताया कि लगभग 1,500 शिक्षकों और कर्मचारियों की भागीदारी के साथ छात्रों को समझाने तथा परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने का प्रयास किया गया।
हालांकि इन प्रयासों के बाद भी छात्र आंदोलन समाप्त नहीं हुआ।
छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी अपनी स्थिति पर कायम हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जताई चिंता
जामिया प्रशासन ने आंदोलन के कारण परिसर की सामान्य व्यवस्था और पढ़ाई पर असर पड़ने की बात कही है।
प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों का नियमित संचालन आवश्यक है।
छात्रों की सुरक्षा, परिसर की व्यवस्था और शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन ने विभिन्न कदम उठाने की बात कही है।
इसी क्रम में पुलिस से औपचारिक शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि प्रशासन के आरोपों और प्रदर्शनकारियों के पक्ष का मूल्यांकन जांच तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
छात्र संघ चुनाव क्यों महत्वपूर्ण हैं?
किसी विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ विद्यार्थियों की समस्याओं और मांगों को संस्थागत रूप से सामने रखने का माध्यम हो सकता है।
छात्र संघ के प्रतिनिधि प्रशासन के समक्ष शिक्षा, छात्रावास, फीस, पुस्तकालय, खेलकूद, परिवहन और परिसर से संबंधित अन्य मुद्दे उठा सकते हैं।
छात्र संघ चुनाव विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी का अवसर भी प्रदान करते हैं।
हालांकि चुनाव कराने की प्रक्रिया विश्वविद्यालय के नियमों, प्रशासनिक निर्णयों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होती है।
जामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग इसी व्यापक बहस से जुड़ी हुई है।
छात्र राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर बहस
जामिया मिलिया इस्लामिया में जारी विवाद ने विश्वविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक अधिकारों के बीच संतुलन का प्रश्न सामने रखा है।
एक ओर आंदोलनकारी छात्र निर्वाचित छात्र संघ को अपना लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए चुनाव बहाली की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन शैक्षणिक गतिविधियों और परिसर की सामान्य व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
दोनों पक्षों के बीच संवाद और नियमों के अनुरूप समाधान निकालना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सांसदों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है।
छात्र संघ चुनाव की मांग पहले मुख्य रूप से विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित थी, लेकिन अब इस विवाद में राजनीतिक नेताओं के नाम सामने आने से इसकी चर्चा बढ़ी है।
पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी।
इस बीच यह भी आवश्यक है कि मामले में शामिल सभी पक्षों के कानूनी अधिकारों और निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया का पालन किया जाए।
विश्वविद्यालय में सामान्य पढ़ाई बहाल करना चुनौती
लगातार जारी आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बनाए रखने की चुनौती है।
छात्रों के लिए नियमित कक्षाएं, परीक्षाएं, शोध कार्य और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं।
वहीं आंदोलनकारी छात्र चाहते हैं कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाए।
ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच प्रभावी बातचीत से समाधान की संभावना बन सकती है।
आगे क्या होगा?
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर फिलहाल विवाद जारी है।
छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि प्रशासन परिसर की सामान्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रयासरत है।
पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच भी आगे बढ़ेगी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ चुनाव को लेकर क्या निर्णय लेता है और आंदोलन समाप्त कराने के लिए किस प्रकार की पहल की जाती है।
जामिया मिलिया इस्लामिया में वर्ष 2006 से छात्र संघ चुनाव नहीं होने का मुद्दा एक बार फिर बड़े आंदोलन का कारण बना है। छात्रों के प्रदर्शन, ऑनलाइन कक्षाओं पर विवाद और सांसदों के खिलाफ एफआईआर के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद तथा पुलिस जांच के परिणाम से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

