रिपोर्टर: ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता उत्तर प्रदेश
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आजमगढ़ शंभूपुर में पांच मौतों के बाद खौफ, 6 बच्चियां और 2 महिलाएं छोड़ गईं घर
आजमगढ़। शंभूपुर गांव का एक घर कभी बच्चों की आवाजों और परिवार की चहल-पहल से भरा रहता था, लेकिन अब उसी घर के दरवाजे पर पुलिस का ताला लगा है। घर के आसपास पुलिस की मौजूदगी है और परिवार के बचे सदस्य गांव से दूर रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं। एक ही परिवार से जुड़ी पांच मौतों के बाद छह बच्चियों और दो महिलाओं के सामने अब सुरक्षा, पढ़ाई और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।
यह वही शंभूपुर गांव है, जहां कुछ दिन पहले पूजा-पाठ के दौरान हुई वारदात ने पूरे इलाके को हिला दिया था। पुलिस के अनुसार, अरविंद सिंह पर अपनी पत्नी बबीता सिंह और पूजा कराने आए दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। इसके बाद वह अपने बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया था। कई घंटे तक पुलिस ने उसे समझाकर आत्मसमर्पण कराने की कोशिश की। बाद में पुलिस कार्रवाई के दौरान अरविंद की मौत हो गई। उसका आठ वर्षीय बेटा शौर्य भी गोली लगने से घायल हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस तरह घटना में अरविंद, उसकी पत्नी, बेटे और दो पुरोहितों समेत पांच लोगों की जान चली गई।
अब सुलतानपुर में रह रहा परिवार
घटना के बाद परिवार की दो महिलाएं और छह बच्चियां आजमगढ़ के शंभूपुर गांव से दूर सुलतानपुर के महमूदपुर गांव में रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं। जिस घर में वे रहते थे, वह पुलिस जांच के चलते बंद है। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें गांव में वापस जाने को लेकर डर बना हुआ है।
बच्चियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनकी पढ़ाई और आगे की जिंदगी का है। वहीं महिलाओं के सामने परिवार चलाने और बच्चों की जिम्मेदारी उठाने की चुनौती है। रिश्तेदारों का कहना है कि यह परिवार फिलहाल मानसिक और आर्थिक दोनों तरह के दबाव से गुजर रहा है।
डर की कहानी कई साल पुरानी
परिवार के मुताबिक, शंभूपुर में डर का माहौल हाल की घटना से शुरू नहीं हुआ। वर्ष 2018 में सुनील सिंह उर्फ गुड्डू सिंह की हत्या हुई थी। परिवार का दावा है कि इस घटना के बाद से परिवार के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ती चली गई। परिजनों के अनुसार, सुनील की हत्या के बाद अरविंद सिंह लोगों से कम मिलने-जुलने लगा था और परिवार के बच्चों को भी स्कूल भेजने में डर महसूस होता था।
हालांकि, 2018 की घटना और हालिया वारदात के बीच सीधा संबंध क्या है, यह जांच का विषय है। परिवार दोनों घटनाओं को अपने लंबे समय से चले आ रहे डर से जोड़कर देखता है, लेकिन पुलिस जांच के निष्कर्ष के बिना किसी सीधी कड़ी को स्थापित नहीं किया जा सकता।
पूजा और ‘साये’ की चर्चा
हालिया घटना से पहले अरविंद के घर में तीन दिनों तक महामृत्युंजय जाप चलने की बात सामने आई थी। परिवार के मुताबिक, अरविंद को लेकर किसी तरह के ‘साये’ की आशंका के चलते यह अनुष्ठान कराया जा रहा था। पुलिस और उपलब्ध रिपोर्टों में भी इस पूजा के आयोजन का उल्लेख है।
पुलिस के मुताबिक, 25 सितंबर से पहले घर में पूजा को लेकर विवाद की सूचना भी 112 नंबर पर दी गई थी। अगले दिन स्थिति ने गंभीर रूप ले लिया और गोलीबारी की घटना हुई। पुलिस का कहना है कि आरोपी के पास लाइसेंसी 32 बोर का रिवॉल्वर था और मौके से कारतूस भी बरामद किए गए।
पुलिस ने बच्चियों की मदद का ऐलान किया
हत्याकांड के बाद परिवार में बची बच्चियों के भविष्य को लेकर आजमगढ़ पुलिस ने सहायता की घोषणा की है। पुलिस के मुताबिक, दो बच्चियों की देखभाल और भविष्य के लिए पुलिस विभाग ने आर्थिक मदद का निर्णय लिया है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने अपनी एक महीने की तनख्वाह उनकी सहायता के लिए देने की घोषणा की है, जबकि पुलिसकर्मियों की ओर से भी एक दिन का वेतन देने की बात कही गई है।
पुलिस ने यह भी बताया कि बच्चों को सरकारी बाल सेवा योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया की जा रही है। 11 वर्षीय बच्ची की काउंसलिंग कराने की पहल भी की गई है, क्योंकि वह इस भयावह घटना की प्रत्यक्ष गवाह रही है।
परिवार के सामने अब कई सवाल
घटना के बाद शंभूपुर गांव में पुलिस की तैनाती है और संबंधित घर जांच के दायरे में है। परिवार के बचे सदस्यों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे कब और किस भरोसे के साथ वापस अपने गांव लौटेंगे।
परिवार के रिश्तेदार सरकार से सुरक्षा और न्याय की मांग कर रहे हैं। उनकी चिंता सिर्फ मौजूदा मामले की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि छह बच्चियों की पढ़ाई, पालन-पोषण और भविष्य को लेकर भी है। परिवार चाहता है कि बच्चियों और महिलाओं को सुरक्षा मिले और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
शंभूपुर का वह घर फिलहाल बंद है। दरवाजे पर पुलिस का ताला लगा है। गांव में घटना की चर्चा और सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिवार के बचे सदस्य सुलतानपुर में रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। उनके लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इस त्रासदी से उबरकर जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाना है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
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