सारण में बाढ़ के बीच गंडक नदी में तैरते दिखे दो तेंदुए, एक पेड़ पर चढ़कर बैठा
छपरा। बिहार के सारण जिले में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। नदी के आसपास के दियारा इलाकों में पानी फैलने के बीच अब जंगली जानवरों की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। तरैया इलाके में ग्रामीणों ने बाढ़ के तेज बहाव में दो तेंदुओं को तैरते हुए देखा। इनमें से एक तेंदुआ पानी में आगे निकल गया, जबकि दूसरा तैरते-तैरते एक पेड़ तक पहुंचा और उस पर चढ़कर बैठ गया। नाव से गुजर रहे लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया।
बाढ़ के पानी में तैरते दिखे दो तेंदुए
घटना तरैया के दियारा इलाके में सगुनी गांव के पास की बताई जा रही है। माधोपुर पंचायत के मुखिया सुशील कुमार सिंह ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नाव से जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर बाढ़ के पानी में तैरते दो जानवरों पर पड़ी।
पहली नजर में दोनों जानवरों की पहचान स्पष्ट नहीं थी, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वे तेंदुए थे। दोनों तेज बहाव के बीच पानी में आगे बढ़ रहे थे।
एक तेंदुआ पेड़ पर चढ़कर बैठ गया
तेज धारा के बीच एक तेंदुआ तैरते हुए आगे निकल गया। वहीं दूसरे तेंदुए को रास्ते में एक पेड़ मिल गया। वह तैरकर पेड़ तक पहुंचा और फिर उस पर चढ़ गया।
कुछ देर बाद तेंदुआ पेड़ के ऊपरी हिस्से में जाकर बैठ गया। आसपास चारों तरफ बाढ़ का पानी था। नाव से गुजर रहे लोगों ने पेड़ पर बैठे तेंदुए को देखा और मोबाइल फोन से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में तेंदुआ बाढ़ के पानी से घिरे इलाके में पेड़ की ऊंची डालियों के बीच बैठा दिखाई दे रहा है।
बाढ़ से पहले ही परेशान हैं ग्रामीण
सारण में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कई दियारा इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कई जगहों पर ग्रामीणों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है। जरूरी कामों और राहत-बचाव के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तरैया के कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी सात से आठ फीट तक पहुंचने की भी रिपोर्ट सामने आई है और SDRF ने लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया है।
ऐसे में बाढ़ के बीच तेंदुओं के दिखाई देने से ग्रामीणों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। लोग नाव से आवाजाही करते समय भी सावधानी बरत रहे हैं।
नेपाल और वाल्मीकिनगर के जंगलों से आने का अनुमान
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का अनुमान है कि दोनों तेंदुए नेपाल की तरफ से आने वाले बाढ़ के पानी के साथ वाल्मीकिनगर के जंगल क्षेत्र से इस इलाके तक पहुंचे होंगे। हालांकि, तेंदुओं के यहां पहुंचने की वास्तविक वजह और उनका रास्ता क्या रहा, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गंडक नदी में बढ़े जलस्तर का असर पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निचले इलाकों पर भी पड़ा है। विशेषज्ञों और वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ के दौरान जंगली जानवर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तलाश में अपना स्थान बदल सकते हैं।
बाढ़ के बीच वन्यजीवों पर भी नजर
गंडक के बढ़े जलस्तर के कारण बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सारण में तटबंधों पर भी दबाव की खबरें सामने आई हैं। ऐसे हालात में प्रशासन और वन्यजीव विभाग के सामने इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों की निगरानी की चुनौती भी है।
स्थानीय स्तर पर लोगों को जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखने और उन्हें पकड़ने या उनके करीब जाने की कोशिश न करने की जरूरत है। तेंदुए जैसे वन्यजीव बाढ़ के कारण घबराए हुए हो सकते हैं, इसलिए उनके दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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