सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: IIT कानपुर एक्सपर्ट ने बताई मिट्टी, पानी और नींव की भूमिका
नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे के बाद इमारतों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हादसे में सात लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। इसी बीच IIT कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा ने बताया है कि किसी भी इमारत की मजबूती सिर्फ ऊपर दिखाई देने वाले ढांचे पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जमीन के नीचे की मिट्टी, नींव और पानी की स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
हादसे की शुरुआत जमीन के नीचे से हो सकती है
प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के मुताबिक, इस तरह के हादसों की शुरुआत कई बार जमीन के नीचे से होती है। उन्होंने बताया कि करीब 95 से 99 फीसदी इमारतें मिट्टी पर ही खड़ी होती हैं। ऐसे में मिट्टी, नींव और पानी के बीच संतुलन इमारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
विशेषज्ञ के मुताबिक, अगर जमीन के नीचे पानी जमा हो जाए, मिट्टी में लगातार नमी बनी रहे या पुरानी नींव के आसपास खुदाई की जाए तो इमारत की भार सहने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
पानी से कमजोर हो सकती है मिट्टी
प्रोफेसर पात्रा ने बताया कि बेसमेंट में पानी भरना केवल जल निकासी की समस्या नहीं है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से मिट्टी की मजबूती प्रभावित हो सकती है और नींव के नीचे जमीन के व्यवहार में बदलाव आ सकता है।
AajTak की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञ ने कहा कि पानी जमा होने से मिट्टी की ताकत काफी कम हो सकती है। इसलिए किसी इमारत के निर्माण और रखरखाव में जमीन के नीचे पानी की स्थिति की जांच भी जरूरी है।
पुरानी नींव पर अतिरिक्त भार भी खतरा
सत्य निकेतन हादसे के बाद सामने आई FIR में पुलिस ने आरोप लगाया है कि पुरानी इमारत के ऊपर अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कराया गया था। पुलिस के मुताबिक, मालिक को कथित तौर पर यह जानकारी थी कि पुरानी नींव अतिरिक्त भार सहने की स्थिति में नहीं थी, फिर भी निर्माण कराया गया।
हालांकि, यह पुलिस की FIR में लगाए गए आरोप हैं। हादसे की अंतिम तकनीकी वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सत्य निकेतन हादसे में 7 लोगों की मौत
सत्य निकेतन में बहुमंजिला PG इमारत गिरने की घटना में कुल सात लोगों की मौत हुई है। हादसे के बाद करीब 27 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। पांच लोग घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी।
हादसे के बाद पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया है। वहीं MCD ने दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है।
आसपास की इमारतों पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद सत्य निकेतन की दूसरी इमारतों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। घटनास्थल के आसपास कई जर्जर इमारतों की स्थिति सामने आई है। प्रशासन ने हादसे वाली इमारत के बराबर की एक अन्य जर्जर बिल्डिंग पर भी कार्रवाई शुरू की है।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि राजधानी में पुराने भवनों और छात्रों के लिए संचालित PG की सुरक्षा जांच कितनी प्रभावी है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
सत्य निकेतन PG हादसे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है। मामले में एमिकस क्यूरी अजीत सिन्हा ने दिल्ली के सभी निजी PG और हॉस्टलों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है।
इससे हादसे के बाद केवल एक इमारत की जांच तक सीमित रहने के बजाय दिल्ली में चल रहे निजी PG और हॉस्टलों की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
क्या है विशेषज्ञ की सलाह?
IIT कानपुर के प्रोफेसर के विश्लेषण से साफ है कि किसी भी इमारत की सुरक्षा के लिए केवल कॉलम, बीम और दीवारों को देखना पर्याप्त नहीं है। मिट्टी की गुणवत्ता, नींव की स्थिति, जल निकासी, बेसमेंट में पानी और आसपास होने वाली खुदाई जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजधानी की पुरानी और PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारतों की नियमित तकनीकी जांच होती है। हादसे की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस विशेष इमारत के गिरने में किन-किन कारणों की भूमिका रही।
रिपोर्टर; गरिमा छाबड़ा, विशेष रिपोर्टर, विपणन प्रबंधक, जनसंपर्क प्रबंधक
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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