CM पुष्कर सिंह धामी के सामने बड़ा दिन, किशाऊ परियोजना पर 6 राज्यों का होगा MoU
देहरादून/नई दिल्ली: उत्तराखंड की लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। 15 सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में इस परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस अहम बैठक में CM पुष्कर सिंह धामी भी शामिल होंगे।
इस समझौते में उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं। MoU के जरिए परियोजना से मिलने वाले पानी और बिजली के लाभ तथा राज्यों की हिस्सेदारी से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को औपचारिक रूप दिया जाएगा।
छह राज्यों के बीच बनेगी सहमति
किशाऊ परियोजना को लेकर जून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। उस बैठक में छह राज्यों के बीच परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। अब 15 सितंबर का MoU उस सहमति को औपचारिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समझौते में यह तय किया जाएगा कि परियोजना से किस राज्य को कितना पानी और बिजली का लाभ मिलेगा। साथ ही जल और बिजली से जुड़े खर्च में राज्यों की भागीदारी का ढांचा भी स्पष्ट होगा।
करीब छह दशक से अटकी है परियोजना
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की योजना करीब छह दशक पहले बनी थी। परियोजना से जुड़े तकनीकी अध्ययन, लागत, जल बंटवारे और राज्यों के बीच वित्तीय हिस्सेदारी जैसे मुद्दों के कारण यह लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।
परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा भी दिया गया था, लेकिन अंतरराज्यीय सहमति नहीं बनने के कारण इसका काम गति नहीं पकड़ सका। अब छह राज्यों की सहमति के बाद इसके आगे बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है।
टोंस नदी पर प्रस्तावित है किशाऊ बांध
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास प्रस्तावित है। परियोजना का उद्देश्य जल भंडारण, सिंचाई और विद्युत उत्पादन के साथ-साथ उत्तर भारत के कई राज्यों की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है।
संशोधित डिजाइन के अनुसार बांध की ऊंचाई करीब 232.6 मीटर होगी। परियोजना की प्रस्तावित स्थापित विद्युत क्षमता 422 मेगावाट है।
जल भंडारण क्षमता भी बढ़ी
परियोजना की नई DPR के अनुसार जलाशय की जीवंत भंडारण क्षमता करीब 1,561.91 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) रखी गई है। इससे मानसून के दौरान पानी के बेहतर भंडारण और बाद के महीनों में उसके उपयोग की क्षमता बढ़ेगी।
परियोजना से करीब 97,076 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है। इससे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ मैदानी राज्यों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
CM पुष्कर सिंह धामी की भूमिका अहम
किशाऊ परियोजना उत्तराखंड के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में CM पुष्कर सिंह धामी के लिए छह राज्यों के बीच होने वाला यह समझौता अहम माना जा रहा है। जून में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी धामी ने उत्तराखंड के हितों से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
उत्तराखंड को परियोजना के बिजली घटक से लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही यमुना बेसिन में जल प्रबंधन बेहतर होने से सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को भी क्षेत्रीय लाभ मिल सकता है।
दिल्ली और राजस्थान को भी मिलेगा फायदा
किशाऊ परियोजना का प्रभाव केवल उत्तराखंड और हिमाचल तक सीमित नहीं रहेगा। समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी का उपयोग दिल्ली और राजस्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था से जुड़ी बातें भी तय की जाएंगी।
दिल्ली के लिए परियोजना को दीर्घकालीन जल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं राजस्थान को पानी के लाभ के बदले परियोजना के बिजली घटक की लागत में योगदान करना होगा।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश को भी परियोजना से सिंचाई और जल उपलब्धता के स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार उठाएगी जल घटक की बड़ी लागत
परियोजना के वित्तीय ढांचे में केंद्र सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार किशाऊ परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने का फैसला किया गया है।
इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ कम करने और परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उत्तर भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है किशाऊ प्रोजेक्ट?
किशाऊ परियोजना को केवल एक बांध या बिजली परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका संबंध उत्तर भारत में जल संरक्षण, सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन से है।
अगर परियोजना से जुड़ी औपचारिकताएं तेजी से पूरी होती हैं, तो लंबे समय से लंबित यह परियोजना जमीन पर उतरने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। छह राज्यों के बीच जल और बिजली के लाभ को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनने से परियोजना के रास्ते में लंबे समय से चली आ रही प्रमुख अड़चन दूर होने की उम्मीद है।
MoU के बाद अगला कदम क्या होगा?
MoU पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को आगे की स्वीकृतियों और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। आधिकारिक प्रसारण के अनुसार समझौते के बाद किशाऊ परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाना है।
इस लिहाज से 15 सितंबर का समझौता परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। CM पुष्कर सिंह धामी के लिए भी यह उत्तराखंड के जल और ऊर्जा हितों को आगे बढ़ाने का अहम अवसर माना जा रहा है।
करीब छह दशक से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना अब छह राज्यों की सहमति के बाद नई गति पकड़ती नजर आ रही है। MoU के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजना की स्वीकृतियां और निर्माण की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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