CM सुखविंदर सिंह सुक्खू का बड़ा दिन, किशाऊ परियोजना पर 6 राज्यों का ऐतिहासिक MoU
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए 15 सितंबर का दिन किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिहाज से अहम है। 422 मेगावाट की किशाऊ परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) की दिशा में लंबे समय से चल रहा गतिरोध अब खत्म होने जा रहा है। इस समझौते में हिमाचल प्रदेश के साथ उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं।
छह राज्यों के बीच होगा समझौता
किशाऊ परियोजना यमुना नदी की सहायक टोंस नदी पर प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना है। परियोजना को लेकर राज्यों के बीच पानी, बिजली और लागत से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी। केंद्र की मध्यस्थता के बाद छह राज्यों के बीच सहमति बनने का रास्ता साफ हुआ है।
15 सितंबर को प्रस्तावित MoU को परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने और संबंधित राज्यों के बीच जल एवं बिजली से जुड़े हिस्सेदारी के मुद्दों को औपचारिक रूप देने में मदद मिलेगी।
हिमाचल के लिए क्यों अहम है किशाऊ परियोजना?
किशाऊ परियोजना सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसे जल प्रबंधन, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी बहुउद्देशीय परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के लिए परियोजना में पानी और बिजली से जुड़े लाभ महत्वपूर्ण हैं।
हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, नए समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश को 378 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी का हिस्सा मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा राज्य को परियोजना से संबंधित वार्षिक बिजली राजस्व का लाभ मिलने की भी रिपोर्ट है।
करीब छह दशक से अटका था मामला
किशाऊ परियोजना को लेकर राज्यों के बीच सहमति बनाने की कोशिश लंबे समय से चल रही थी। परियोजना करीब छह दशक से अलग-अलग कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी थी। जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल के बाद छह राज्यों के बीच सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई थी।
हिमाचल प्रदेश सरकार भी परियोजना से जुड़े MoU के मसौदे पर चर्चा कर चुकी है। राज्य सरकार के मुताबिक मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में जुलाई में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के 422 मेगावाट प्रस्तावित प्रोजेक्ट से जुड़े MoU के मसौदे की समीक्षा की गई थी।
422 MW बिजली उत्पादन की क्षमता
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की प्रस्तावित स्थापित क्षमता 422 मेगावाट है। परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ बिजली उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। छह राज्यों के बीच समझौता परियोजना के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।
सुक्खू सरकार के लिए अहम उपलब्धि
हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए किशाऊ परियोजना से जुड़ा समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य लंबे समय से अपने जल संसाधनों और बिजली परियोजनाओं में उचित हिस्सेदारी की मांग करता रहा है। नए समझौते में हिमाचल के हितों को सुरक्षित करने को लेकर राज्य सरकार की भूमिका अहम मानी जा रही है।
MoU के बाद परियोजना से जुड़े अन्य प्रशासनिक और तकनीकी कदम आगे बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में किशाऊ परियोजना को हिमाचल प्रदेश के जल और ऊर्जा क्षेत्र के लिए आने वाले वर्षों की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जा रहा है।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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