शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कथित पुलिस कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र जांच की मांग, डॉ. चरणजीत सिंह का आंदोलन जारी
राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित निकायों को शिकायत भेजने का दावा; निष्पक्ष जांच, प्रमाणों के संरक्षण और सार्वजनिक जवाबदेही पर जोर
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. चरणजीत सिंह ने दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, प्रदर्शनकारियों की कथित हिरासत, पुलिस की कार्रवाई, पत्रकारों की स्वतंत्रता और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े कथित प्रतिबंधों के संबंध में स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने संबंधित घटनाओं की निष्पक्ष समीक्षा कराने और यदि किसी अधिकार के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।
डॉ. चरणजीत सिंह, जो दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द हिन्दी समाचार पत्र के संपादक एवं प्रकाशक भी हैं, के अनुसार उन्होंने 10 अक्टूबर 2026 को भारत के राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, निर्वाचन आयोग, संयुक्त राष्ट्र के संबंधित निकायों, विभिन्न मानवाधिकार संस्थाओं तथा कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को ईमेल के माध्यम से लिखित शिकायत भेजी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से भी मामले की निष्पक्ष पड़ताल करने और उपलब्ध तथ्यों को सामने लाने की अपील की है।
उनकी मांग है कि संबंधित घटनाओं से जुड़े सरकारी आदेशों, पुलिस रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके और जिम्मेदारी तय करने में किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर उठाए सवाल
डॉ. चरणजीत सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण असहमति व्यक्त करना, अपनी बात रखना और कानूनी अधिकारों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शनकारियों की आवाजाही, पुलिस की तैनाती, बैरिकेडिंग और प्रदर्शनकारियों की कथित हिरासत से संबंधित घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन उन कदमों का कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप हो।
डॉ. सिंह ने संबंधित प्रशासन से कुछ प्रमुख सवालों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है। इनमें प्रदर्शनकारियों को रोकने या हिरासत में लेने के आदेश, उन आदेशों का कानूनी आधार, उन्हें मंजूरी देने वाले सक्षम अधिकारियों की भूमिका और प्रदर्शन के दौरान नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजाम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन सवालों का उत्तर केवल बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि मूल सरकारी अभिलेखों और प्रमाणों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की जवाबदेही की मांग
डॉ. चरणजीत सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से प्रदर्शन से जुड़े वैधानिक आदेशों, सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा कराने का आग्रह किया है।
उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया हो या किसी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो, तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आवश्यक हिस्सा है और किसी भी कार्रवाई की वैधता का आकलन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
डॉ. सिंह ने संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि प्रदर्शन के दौरान कौन-कौन से आदेश लागू किए गए, उनकी अवधि क्या थी और उन्हें लागू करने का आधार क्या था।
हालांकि, उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले आधिकारिक दस्तावेज या संबंधित विभागों का पक्ष शामिल नहीं है। इसलिए कथित कार्रवाई और संभावित अधिकार उल्लंघन से जुड़े दावों की स्वतंत्र जांच आवश्यक होगी।
पत्रकारों की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका पर जोर
डॉ. चरणजीत सिंह ने प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के कामकाज और समाचार संकलन की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक घटनाओं की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अपना काम करने के लिए कानून के अनुरूप आवश्यक अवसर मिलना चाहिए।
उनकी मांग है कि यदि किसी पत्रकार को रिपोर्टिंग से रोका गया हो या उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया हो, तो संबंधित घटना की परिस्थितियों की जांच की जाए। इसके लिए मौके पर मौजूद पत्रकारों के बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की जा सकती है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से भी अपील की कि वह मामले को निष्पक्षता के साथ देखे, सभी पक्षों का बयान प्राप्त करे और अपुष्ट दावों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत न करे।
मेट्रो और रेल सेवाओं से जुड़े प्रतिबंधों पर स्पष्टीकरण मांगा
डॉ. सिंह ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जुड़े कथित प्रतिबंधों और परिचालन बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशन, रेल सेवाएं या अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुए थे, तो संबंधित विभाग उनके कारण, अवधि और अधिकृत आदेशों की जानकारी सार्वजनिक करें।
उनका कहना है कि सार्वजनिक परिवहन में बदलाव के पीछे सुरक्षा या प्रशासनिक कारण हो सकते हैं, लेकिन संबंधित निर्णयों का विवरण स्पष्ट होना चाहिए। इससे नागरिकों को वास्तविक स्थिति समझने और किसी भी निर्णय की वैधानिकता का आकलन करने में मदद मिलेगी।
प्रेस विज्ञप्ति में इन कथित प्रतिबंधों के संबंध में किसी विशिष्ट आदेश, स्टेशन या सेवा का विस्तृत आधिकारिक रिकॉर्ड संलग्न नहीं किया गया है। ऐसे में संबंधित विभागों की आधिकारिक जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मीडिया से स्वतंत्र जांच की अपील
डॉ. चरणजीत सिंह के अनुसार, उनकी शिकायत का विवरण 10 अक्टूबर को कुछ डिजिटल समाचार मंचों पर भी प्रकाशित हुआ था। उन्होंने कहा कि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का उद्देश्य संबंधित घटनाओं की निष्पक्ष समीक्षा, प्रमाणों का संरक्षण और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को सामने लाना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाचार मंचों पर शिकायत से संबंधित विवरण प्रकाशित होना अपने आप में आरोपों की न्यायिक पुष्टि या संबंधित संस्थाओं द्वारा शिकायत पर कार्रवाई शुरू किए जाने का प्रमाण नहीं है। उनके अनुसार, वास्तविक स्थिति का निर्धारण संबंधित संस्थाओं के आधिकारिक जवाब, उपलब्ध दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच से ही किया जा सकता है।
डॉ. सिंह ने संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आग्रह किया है कि वे शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर अपने अधिकार क्षेत्र और लागू प्रक्रियाओं के अनुसार विचार करें।
प्रमाणों के संरक्षण और पारदर्शी जांच पर विशेष जोर
डॉ. चरणजीत सिंह ने कहा कि मामले में निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए सभी प्रासंगिक प्रमाणों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। इनमें सरकारी आदेश, पुलिस रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पत्रकारों की रिकॉर्डिंग और संबंधित न्यायिक दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने मांग की कि जांच के दौरान सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए और निष्कर्ष तथ्यों के आधार पर निकाले जाएं। यदि किसी स्तर पर कानून या नागरिक अधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि पारदर्शी जांच से न केवल संबंधित घटनाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति नागरिकों का विश्वास मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
आंदोलन जारी रखने की घोषणा
डॉ. चरणजीत सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को उठाने का उनका प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि शिकायत में उठाए गए सवालों पर तथ्यात्मक जवाब दिया जाए और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर उचित प्रक्रिया अपनाई जाए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं से भी आग्रह किया कि वे मामले पर नजर रखें और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित पक्षों की बात सुनें।
फिलहाल, प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित सरकारी संस्थाओं की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक स्पष्टीकरण, अभिलेखों और निष्पक्ष जांच के निष्कर्षों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


