सूरत बना नया कंजम्पशन हब, बड़े महानगरों के बाहर सबसे बड़ा बाजार; जानें क्यों बढ़ रहा घरेलू खर्च
सूरत: भारत में कंजम्पशन यानी घरेलू खपत की कहानी लंबे समय से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों के आसपास केंद्रित रही है। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। छोटे और उभरते शहरों में बढ़ती आय और बदलती जीवनशैली के साथ उपभोक्ता खर्च में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण सूरत बनकर सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत देश के शीर्ष कंजम्पशन मार्केट्स में सातवें स्थान पर है और छह बड़े महानगरों को छोड़कर यह देश का सबसे बड़ा कंजम्पशन बाजार है।
सूरत में क्यों बढ़ रहा घरेलू खर्च?
सूरत की अर्थव्यवस्था लंबे समय से टेक्सटाइल, डायमंड और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों पर मजबूत रही है। इन उद्योगों ने शहर में रोजगार और आय के बड़े अवसर पैदा किए हैं।
आय बढ़ने के साथ लोगों की खर्च करने की क्षमता भी बढ़ी है। इसका असर सिर्फ रोजमर्रा के सामान की खरीदारी पर नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, रियल एस्टेट, मनोरंजन और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स की मांग पर भी दिखाई दे रहा है।
यही वजह है कि सूरत तेजी से देश के प्रमुख कंजम्पशन सेंटर के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
छह बड़े महानगरों के बाहर सबसे बड़ा बाजार
भारत के छह प्रमुख महानगरों—मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता—का देश की खपत में लंबे समय से बड़ा योगदान रहा है।
लेकिन रिपोर्ट बताती है कि इन महानगरों के बाहर भी कई शहरों में घरेलू खर्च का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इनमें सूरत सबसे आगे है।
सूरत के साथ चंडीगढ़, तिरुवनंतपुरम और वडोदरा जैसे शहर भी उच्च घरेलू खपत वाले शहरों के रूप में उभर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इन शहरों में प्रति परिवार खर्च छह बड़े महानगरों की तुलना में भी अधिक दर्ज किया गया है।
चंडीगढ़ और तिरुवनंतपुरम भी आगे
सूरत अकेला ऐसा शहर नहीं है जहां उपभोक्ता खर्च तेजी से बढ़ रहा है। चंडीगढ़ और तिरुवनंतपुरम भी औसत घरेलू खपत के मामले में देश के प्रमुख शहरों में शामिल हैं।
वडोदरा भी इस सूची में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इन शहरों में अपेक्षाकृत बेहतर आय, शिक्षा, रोजगार और जीवनशैली के कारण परिवारों की खर्च करने की क्षमता मजबूत हुई है।
यह बदलाव संकेत देता है कि भारत का कंजम्पशन मार्केट अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है।
36 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाले परिवार बढ़े
रिपोर्ट में भारत के उच्च आय वर्ग के तेजी से विस्तार की ओर भी इशारा किया गया है।
36 लाख रुपये से अधिक सालाना कमाने वाले परिवारों की हिस्सेदारी पिछले एक दशक में करीब 3 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई है।
उच्च आय वाले परिवारों की संख्या बढ़ने से प्रीमियम और हाई-वैल्यू उत्पादों की मांग भी बढ़ती है। ऐसे परिवार घर, कार, इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्रा, शिक्षा और बेहतर लाइफस्टाइल पर अधिक खर्च करने की क्षमता रखते हैं।
घरेलू उपकरणों की खरीद में भी सूरत आगे
सूरत में बढ़ती खपत का असर घरेलू उपकरणों की पहुंच में भी दिखाई देता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत में वॉशिंग मशीन की पहुंच करीब 40 प्रतिशत है, जबकि छह बड़े महानगरों में यह आंकड़ा लगभग 30 प्रतिशत है।
इसी तरह माइक्रोवेव की पहुंच सूरत में करीब 31 प्रतिशत बताई गई है, जबकि छह बड़े महानगरों में यह लगभग 27 प्रतिशत है।
ये आंकड़े बताते हैं कि सूरत में परिवारों की उपभोग क्षमता केवल जरूरी वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक घरेलू उपकरणों की मांग भी मजबूत है।
रियल एस्टेट के लिए भी बड़ा संकेत
सूरत में बढ़ता घरेलू खर्च रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।
जब किसी शहर में आय और उपभोक्ता खर्च बढ़ता है तो आमतौर पर बेहतर आवास, कमर्शियल स्पेस और आधुनिक सुविधाओं की मांग में भी इजाफा होता है।
सूरत में पहले से ही टेक्सटाइल और डायमंड उद्योग का मजबूत आधार है। इसके साथ बढ़ती घरेलू खपत शहर के रियल एस्टेट और रिटेल सेक्टर के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा कर सकती है।
बदल रही है भारत के कंजम्पशन मार्केट की तस्वीर
भारत के कंजम्पशन मार्केट में यह बदलाव केवल सूरत तक सीमित नहीं है। देश के कई टियर-2 और टियर-3 शहरों में आय, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधुनिक रिटेल नेटवर्क बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं की आदतें बदल रही हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट की बढ़ती पहुंच ने छोटे शहरों के उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स तक आसान पहुंच दी है।
इसका फायदा कंपनियों को भी मिल रहा है। कंपनियां अब केवल महानगरों पर निर्भर रहने के बजाय छोटे और मध्यम शहरों में विस्तार की रणनीति बना रही हैं।
कंपनियों के लिए क्या है संकेत?
सूरत का तेजी से बढ़ता कंजम्पशन मार्केट कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर है।
रिटेल, FMCG, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए ऐसे शहर महत्वपूर्ण बाजार बन सकते हैं।
बढ़ती आय के साथ उपभोक्ता अब केवल कम कीमत वाले उत्पादों पर निर्भर नहीं हैं। ब्रांडेड, प्रीमियम और सुविधाजनक उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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